'विज्ञान प्रगति' तक पहुंचा 'तस्‍लीम' का कारवां....

 
'तस्‍लीम' द्वारा 'विज्ञान प्रसार' एवं 'नेशनल बुक ट्रस्‍ट' के सहयोग से दिनांक 26-27 दिसम्‍बर, 2012 को आयोजित 'क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन' कार्यशिविर के समाचार लगभग सभी स्‍थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए हैं। 
 
इस पर एक रिपोर्ट विज्ञान की सबसे लोकप्रिय पत्रिका 'विज्ञान प्रगति' के फरवरी, 2012 के अंक में भी प्रकाशित हुई है। कृपया आप भी इसका अवलोकन करें।
अगर आपको 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

10 प्रतिक्रियाएँ:

veerubhai said...

बधाई !तस्लीम ,मुबारक तस्लीम .

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बढ़िया.

Urmi said...

बहुत बढ़िया लगा! शानदार !

मनोज बिजनौरी said...

तस्लीम परिवार को बहुत बहुत बधाई !
क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथाओं के लेखन से विज्ञान जगत में लोगो की रुचि को बढावा मिलेगा और साथ ही साथ जहा गाँव और शहरो में भी लोगो की सोच को काफी हद तक अंधविश्वास से भी दूर रखा जा सकता है क्यों की क्षेत्रीय भाषाओ में विज्ञान लेखन से वो उसमे रुचि लेगे और समझने में भी सहायक होगा !

PRABIN KUMAR SHARMA said...

congratulations....

veerubhai said...

बधाई डॉ जाकिर भाई ,डॉ .अरविन्द भाई साहब .
बढे चलो !बढे चलो !
सितारों से आगे जहां और भी है ,
तेरे सामने इम्तिहान और भी हैं .

veerubhai said...

बधाई डॉ जाकिर भाई ,डॉ .अरविन्द भाई साहब .
बढे चलो !बढे चलो !
सितारों से आगे जहां और भी है ,
तेरे सामने इम्तिहान और भी हैं .

अभिषेक मिश्र said...

बधाई.

ePandit said...

बधाई। बढ़िया काम हो रहा है तो चर्चे तो होंगे ही।

दर्शन लाल बवेजा said...

बधाई।

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