एक नए अध्ययन के अनुसार युवतियों की ज़िन्दगी में खासकर उम्र के बीसम बीसे के मध्य में (मिड त्वेंतीज़ में) उन युवतियों में स्किन प्रोब्लम के रूप में कील मुंहासे की समस्या देखने को मिली है जो कामयाबी की मंजिले एक के बाद एक चढ़ती चली जाती हैं.
माहिरों के अनुसार शायद इसकी एक वजह पिछली पीढ़ी के बरक्स इस पीढ़ी की औरत का साबका (मुकाबला) स्ट्रेस से अपेक्षाकृत ज्यादा होता है नतीज़न इसी दवाब के चलते ज्यादा मात्रा में पुरुष हारमोन पैदा हो रहें हैं जो तेल के उत्पादन को हवा दे रहा है, रोमकूप बंद हो रहें हैं तैलीय ग्रंथि अति-सक्रिय हो रही है. मजेदार बात यह है इन युवतियों का चेहरा किशोरावस्था में बेदाग़ था लेकिन मिड त्विन्तीज़ में चेहरे पर स्पोट्स ही स्पोट्स.
चमड़ी रोगों के माहिरों के अनुसार अपनी प्रकृति में भी युवावस्था के ये मुंहासे किशोरावस्था के एकने से फर्क हैं, जुदा हैं. किशोरावस्था में इनका फैलाव "T-ZONE" यानी ठोड़ी, नासिका और मस्तक के गिर्द रहता है जबकी युवावस्था में यह चमड़ी के नीचे गहरे पैठते हैं.
Adolescents tend to get them around the "T-zone"of the chin ,nose and forehead, Women past their mid-twenties get more persistent spots which are deeper under the skin, 'The Daily Telegraph' reported.
औरतों में मर्दों के बरक्स तीन गुना ज्यादा संभावना बनी रहती है कील मुंहासों की क्योंकि इनकी चमड़ी मेल होरमोन के प्रति ज्यादा संवेदी होती है. माहिरों के अनुसार अब इस बात का फैसला, पुनर-मूल्यांकन हो जाना चाहिए कि कील मुंहासों की चपेट में आखिर आ कौन रहा है? एडल्ट वोमन इनकी चपेट में लगातार आ रही है. कुछ को इसका सामना थोड़ा देरी से तब करना पड़ता है जब एक ही समय पर घर बाहर परिवार और करियर के बीच तालमेल बिठाने की कला मे माहिरी क्या बाजीगरी उन्हें करनी पड़ती है.
एक दिल चस्प बात यह भी है एडल्ट एकने ज्यादा अनियमित हैं ज्यादा sporadic हैं. कभी कभार दिखलाई देतें हैं एक ही माह में माहवारी से पहले और माहवारी के दौरान ये प्रगट होतें हैं ८५% मामलों में ऐसा ही हमला हो रहा है कील मुन्हासों का युवतियों में..
एक ख़ास बात और माहिरों के अनुसार निकोटिन तैलीय सीबम के उत्पादन को बढा देती है .इसीलिए जो युवतियां धूम्रपान करतीं हैं उनमे कील मुंहासों के हमले अकसर और ज्यादा हो रहे हैं.
फैशन स्टेटमेंट, पीयर प्रेशर, और कथित आज़ादी के तहत आप फिर भी स्मोक करतीं हैं तब आपकी मर्जी, वैसे आपके लिए मौतार्माओं धूम्रपान छोड़ने की यह एक वाजिब वजह तो है ही. आज के दौर में सारा खेल लुक्स का है. सुदर्शन, सुदर्शना दिखने रहने का दौर है यह.
(Stress causing acne in successful women?/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA, MUMBAI, NOVEMBER 28, 2011, P17).


4 प्रतिक्रियाएँ:
ओह, तभी तो मैं कहूं कि आजकल युवतियों में क्यों मुहांसे देखने को मिलते हैं।
आपने युवतियों की समस्याओं पर ध्यान दिया पर हम युवकों की समस्याओं का समाधान भी तो कीजिएगा.
बहुत सुन्दर रचना। धन्यवाद।
ब्लॉग बुलेटिन पर की है मैंने अपनी पहली ब्लॉग चर्चा, इसमें आपकी पोस्ट भी सम्मिलित की गई है. आपसे मेरे इस पहले प्रयास की समीक्षा का अनुरोध है.
स्वास्थ्य पर आधारित मेरा पहला ब्लॉग बुलेटिन - शाहनवाज़
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