भू-विज्ञान के संस्थापक पुरुषों में एक - निकोलस स्टेनो (जन्मदिन पर विशेष )



11 जनवरी जब गूगल ने भी सम्मान दिया उन निकोलस स्टेनो को उनकी 374 वें जन्मदिन पर याद करके, जिन्हें 'Father of Geology &  Stratigraphy ' (भू-विज्ञान व भू-स्तरिकी) के नाम से याद किया जाता है. 11  जनवरी 1938 को कोपेनहेगन में जन्मे निकोलस ने किशोरावस्था में ही निश्चय कर लिया था कि वो मात्र पुस्तकों में लिखे शब्दों पर नहीं बल्कि अपने शोध व अनुभवों से अर्जित ज्ञान पर ही विश्वास करेंगे. स्वर्जित ज्ञान की यह पिपासा ही उन्हें चिकित्सा विज्ञान पर महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरते हुए भू-विज्ञान की ओर ले गई.    


युवावस्था से ही वो भ्रमणशील रहे. इस क्रम में उन्हें कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के संपर्क में आने का अवसर मिला, जिनसे उन्हें अपनी वैज्ञानिक खोजों के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करने में भी काफी सहायता मिली. 


संयोगवश एक शार्क के धड़ का अध्ययन करते हुए उन्होंने पाया कि उसके दांतों की साम्यता कुछ ऐसे 'पथरीले' अवयवों से है जो कुछ चट्टानी संरचनाओं में पाए गए थे. अब तक ऐसे अवशेष आसमान या चाँद से आये हुए माने जाते थे. कुछ अन्य मतों में इन्हें चट्टानों में प्राकृतिक रूप से विकसित ही माना जाता था. निकोलस ने यहाँ से एक नए सिद्धांत की बुनियाद रखी कि पदार्थ अपने बाह्य स्वरूप को अक्षुण  रखते हुए भी आतंरिक रासायनिक संरचना में परिवर्तित हो सकते हैं. यहीं से उनकी एक नई खोज भी शुरू हुई कि किस प्रकार कोई ठोस पदार्थ किसी अन्य ठोस या चट्टान के अन्दर पाया जा रहा है !!! उनकी यह खोज न सिर्फ जीवाश्म बल्कि खनिज, क्रिस्टल्स, Rock Veins आदि कई क्षेत्रों के लिए अहम् सिद्ध हुई. इस दिशा में उनके शोधों ने भू-विज्ञान के कुछ बुनियादी सिद्धांतों की नींव रखी जो ' Law of Superposition ', 'Principal of Original Horizontality '  और 'The Principal of Lateral Continuity' के रूप में विख्यात हैं. निकोलस के ये सिद्धांत भू-विज्ञान और भू-स्तरिकी के आगामी कई सिद्धांतों के विकास की भी आधारशीला बने. 

भू-विज्ञान की एक शाखा 'क्रिस्टलोग्राफी' में तो एक 'Steno Law ' ही है जो क्रिस्टल्स के कोणों पर आधारित है. 

विज्ञान से ज्यादा गहरे से जुड़ा व्यक्ति आध्यात्म से भी दूर नहीं रह सकता. निकोलस के व्यक्तित्व में भी इसकी झलक दिखाई पड़ी और वो कैथोलिक मत से जुड़ते हुए बिशप भी रहे. 1686 में उनके निधन के बाद उन्हें संत की श्रेणी में लाने की भी कवायद शुरू हुई, और 1988 में उन्हें 'बिटस' की उपाधि भी दी गई. 

उनकी स्मृति में किये गए कई आयोजनों में डेनमार्क में एक म्यूजियम की स्थापना. मंगल और चन्द्रमा पर दो क्रेटर्स  का नामकरण उनके नाम पर किया जाना आदि प्रमुख हैं. चिकित्सा तथा भू-विज्ञान जगत उनके योगदानों के लिए सदा ऋणी रहेगा.  

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3 प्रतिक्रियाएँ:

veerubhai said...

महत्वपूर्ण जानकारी और जीवन सार .

Dr. Zakir Ali Rajnish said...

निकोलस स्टेनो se milwane ka shukriya.

ASHA BISHT said...

jaankari dene hetu dhanyvaad..

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