क्या दफ्तर में आप उनींदे रहतें हैं ? यदि हाँ तो चौकन्ना रहने के लिए खाइए अंडे.

 
बेशक अंडा सेहत के माहिरों द्वारा उतनी स्वीकृति प्राप्त नहीं कर सका है.खासकर एग यलो अंडे की पीली ज़र्दी कोलेस्ट्रोल का स्रोत समझी गई है .हमारे अश्थी रोग के माहिर ने हमें रोज़ एक अंडा खाने की सिफारिश की तो दिल के माहिर ने कहा भैया बाजरा खाओ केल्शियम की आपूर्ति के लिए .कभी हमने एक अन्य अध्ययन को खंगालते हुए पाया चिकनाई के माहिर कई पोषण विज्ञानी अंडे को उतना बुरा नहीं मानतें हैं जितना यह समझ लिया गया है .मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूँ जो आम्लिट भी एग वाईट का ही बनवातें हैं एग यलो को अलग रख देतें हैं कोई और चाहे तो खाए.

अब साइंसदान एग यलो के गुण गायन में कह रहें हैं- यदि कामकाजी स्थल पर आप उनींदे रहते हैं जब तब नैप के लपेटे में आते है तब चुस्त दुरुस्त चौकन्ने बने रहने के लिए बस एक अंडा रोज़ खाइए इसके सफ़ेद भाग में मौजूद प्रोटीन आप को सचेत बनाए रहेगी.

केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने दम ख़म को बनाए रखने एनर्जी बूस्टर के रूप में चोकलेट्स बिस्किट्स और स्वीट्स में मौजूद कार्बोहाईद्रेतों (Carbohydrates) के बरक्स अंडे से प्राप्त प्रोटीनों को ज्यादा कारगर, असरकारी पाया है .रिसर्चरों का मकसद यह पता लगाना था कि कैसे पुष्टिकर तत्व दिमागी कोशाओं (न्युरोंस )को प्रभावित करतें हैं .यही न्युरोंस हमें चौकन्ना बनाए रहतें हैतथा ऊर्जा को ठिकाने लगातें हैं.

एक उत्तेजक स्तिम्युलेंत(Stimulant) होता है ओरेक्सिंन (Orexin) साइंसदानों ने अपने अध्ययन में एग वाईट में मौजूद प्रोटीन जैसा ही एक मिश्र जब ब्रेन सेल्स पर आजमाया तब पता चला वह इस उत्तेजक पदार्थ के उत्पादन को उकसा देता है. जबकि शक्कर (Sugar)इसके स्राव को बाधित करती है.

शोध के अगुवा साइंसदान डॉ. डेनिस बुर्दाकोव कहतें हैं आपकी कलाकारी इसमें है कैसे आप इन चुनिन्दा कोशिकाओं को चुनिन्दा खाद्यों से अधिकाधिक कारगर बनाएं ट्यून करें इन्हें दुरुस्त रहने के लिए. मान लीजिए आपके सामने नाश्ते में दो विकल्प रखे जातें हैं:
(१) जैम लगे टोस्ट.
(२) एग वाईट से सने टोस्ट.

आपकी बुद्धिमानी यह है आप दूसरा विकल्प चुनें. बेशक दोनों में केलोरीज़ का लोड यकसां हो. प्रोटीन को भांप आपका शरीर प्राप्त केलोरीज़ की ज्यादा से ज्यादा खपत को उकसाएगा. शोधार्थियों ने यह भी पता लगाया है कि अंडे में जिस किस्म का कोलेस्ट्रोल पाया जाता है उससे दिल की बीमारियों का ख़तरा न्यूनतर रहता है. पूर्व में संपन्न शोध से भी ऐसी ही ध्वनी आई थी अपने काम पर अंडा खाके निकलिए. मान्यता के विपरीत यह स्वास्थ्यकर फ़ूड के तहत आयेगा.

सन्दर्भ-सामग्री: Have eggs to stay alert at work (PTI)/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA, NEW-DELHI, NOV 18, 2011/P21.

5 प्रतिक्रियाएँ:

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

अभी परसों ही एक ट्रे लेकर आया हूं...

DR. ANWER JAMAL said...

@ पंडित वीरेन्द्र शर्मा जी ! आपने आज एक बड़ी समस्या का निदान पेश किया है। यह सही है कि अंडा एनर्जी देता है।
मुर्गी का अंडा तो दुनिया खा ही रही है लेकिन चरक और सुश्रुत ने बकरे के अंडे अर्थात वृषण खाने का विधान भी दिया है।

मांस में प्रोटीन होता है और यह मनुष्य के लिए उपयोगी है। इस तथ्य को आज विज्ञान भली भांति स्वीकार रहा है। इसकी खोज हमारे पूर्वज उनसे बहुत पहले कर चुके हैं। आयुर्वेद के चरक और सुश्रुत जैसे महान ग्रंथों में वह अपनी खोज को दर्ज कर चुके हैं और यह सिद्ध है कि इन ग्रंथों की रचना उन्होंने वैदिक धर्म का पालन करते हुए ही की है।

आज बल-पौरूष की कमी दुनिया के सामने एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दुनिया वियाग्रा जैसी दवाओं का सहारा लेने पर मजबूर है। इन दवाओं के साइड इफ़ेक्ट भी सामने आ रहे हैं। लोग खा रहे हैं और मर रहे हैं।

हमारे महान भारतीय मनीषियों ने इस समस्या का निदान भी आयुर्वेद के ज़रिये किया है। उनके बताए नुस्ख़े का इस्तेमाल करने के बाद एक मर्द 100 औरतों को चरम सुख की प्राप्ति करा सकता है। आनंद का रहस्य हमारे पूर्वज अच्छी तरह जानते थे और उन्होंने उसे हमारे लिए सुलभ भी कराया है।

जो इस रहस्य को जानते हैं वे आज भी लाभ उठा रहे हैं। आप भी उठाइये।

हमारे एक दोस्त हरिद्वार के पास ही रहते हैं। हरिद्वार में मांस नहीं बिकता लेकिन ज्वालापुर में बिकता है। वहां एक क़साई से हमारे दोस्त ने पूछा कि आपका काम यहां कैसा चलता है ?

उसने कहा कि सुबह को दो बकरे काटता हूं और शाम को पांच।

सुबह के बकरे मुसलमान ले जाते हैं और शाम के बकरे आश्रमों में चले जाते हैं।
हमारे आयुर्वेद में सबके कल्याण के लिए प्रयास किया गया है। जिसकी जैसी ज़रूरत हो, वह आयुर्वेद से अपनी ज़रूरत पूरी कर सकता है। दुख की बात यह है कि आयुर्वेद पर हमें जैसे ध्यान देना चाहिए, हम नहीं दे पा रहे हैं और अंग्रेज़ हम से बढ़कर इस पर रिसर्च कर रहे हैं। हम तो चरक और सुश्रुत की बात कर रहे हैं। इनके नुस्ख़ों पर किसी को कोई आपत्ति हो तो हमें बताई जाए।

♠ एक उम्दा पोस्ट के लिए आपका आभार।
क्या इस पोस्ट को हम अपने ब्लॉग पर साभार पेश कर सकते हैं ?

आयुर्वेद के शक्तिशाली नुस्ख़ों का पूरा विवरण निम्न लिंक पर उपलब्ध है-

♥ मर्द को शक्तिशाली बनाता है आयुर्वेद Impotency
http://aryabhojan.blogspot.com/2012/01/impotency.html

कुमार राधारमण said...

जब जो अनुकूल हो,खाना चाहिए।

दर्शन लाल बवेजा said...

जो दिल को भाये वो खाओ
सख्तजान नहीं बनो

veerubhai said...

निश्चय ही स्वास्थ्यकर भोजन के रास्ते में आश्थाएं और विश्वास नहीं आने चाहिए .व्याग्रा के दुष्प्रभाव ओवर इरेक्शन के रूप में सामने आ चुकें हैं .यह मूलतया दिल को पर्याप्त रक्तापूर्ति करवाने के लिए तैयार की गई थी .जहां त़क मीट का सवाल है खासकर रेड मीट का इसकी भूमिका स्पष्ट नहीं है विवादों के घेरे में है रेड मीट से कैंसर रोग समूह को बल मिल रहा है .खासकर कोलन कैंसर को .हमें अपनी विरासत के प्रति अनुरागी होना ही चाहिए अमरीकियों की तरह .जो हम नहीं हैं .बधाई इस प्रयत्न के लिए .डॉ अनवर जमाल जी .

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