अर्थ एक्सपेरीमेंट: आओ पृथ्वी की परिधि नापें Earth Experiment
सी. वी. रमण विज्ञान क्लब के सदस्य और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर के विद्यार्थी २१और२२ दिसम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग करेंगे ।
सी. वी. रमण विज्ञान क्लब के सहयोग से स्कूल के छात्रों ने सम्बन्धित उपकरण तैयार कर लिए हैं ।
इस प्रयोग को अर्थ एक्सपेरीमेंट के नाम से जाना जाता है ।
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| अर्थ एक्सपेरीमेंट |
पृथ्वी की परिधि नापने का यह प्रयोग पूरे विश्व में साल में चार दिनों में ही किया जाता है क्यूंकि इस खास दिनों में ही सूर्य भूमध्य रेखा,मकर रेखा और कर्क रेखा पर रहता है ये दिन विषुव और ग्रीष्मकालीन अयनांत और शीत अयनांत कहलाते हैं।
२२ दिसम्बर को शीत अयनांत यानी विंटर साल्सिटस होता है इस दिन ११ बजे प्रातः से १ बजे अपराह्न तक अलाहर स्कूल के विद्यार्थी विश्व के कईं देशों के बच्चों के साथ मिल कर यह प्रयोग करेंगे जिसके परिणामों के तुलनात्मक अध्ययन से पृथ्वी की परिधि पता चलेगी ।
पहले भी यह प्रयोग किया जा चुका है देखें।
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| बड़ी करके देखें |
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बताया कि पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा करने के दौरान एक वर्ष में दो बार ऐसी स्तिथि आती है जब २१ जून सबसे लंबा दिन और २२ दिसम्बर को सबसे लंबी रात होती है इस खगोलीय घटना को ग्रीष्मकालीन अयनांत और शीत अयनांत कहते हैं।
शीत अयनांत (विंटर साल्सिटस) २२ दिसम्बर की रात को सबसे लंबा बना देगा साल्सिटस लैटिन भाषा का शब्द है जिसे दो भागो में बाँट कर देखा जाए तो सोल जिस का अर्थ है सूर्य और और दुसरा भाग सिस्टटेरे जिस का अर्थ है जस का तस खड़ा होना शीत अयनांत वह दिन है जब पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध का उसकी धुरी की और झुकाव अधिकतम होता है जिसके परिणाम स्वरूप उत्तरी गोलार्ध में भयंकर सर्दी होती है और उस दिन की रात्री वर्ष की सब से लंबी रात होती है जो कि गुरूवार को १३ घंटे व २३ मिनट की रात रहेगी जबकि दिन १० घंटे व ३७ मिनट का होगा।
२२ दिसम्बर को जब सूर्य दोपहर को मकर रेखा के उपर होगा तब यह दो घंटे की अवधि अर्थ एक्सपेरीमेंट करने की सबसे उत्तम अवधि होगी अलाहर स्कूल के व सी. वी. रमण विज्ञान क्लब के सदस्य ६० विद्यार्थी १० समूहों में इस प्रयोग को करेंगे प्रत्येक ४ मिनट के अंतराल पर अपने उपकरण के दंड की परछाई नाप कर नोट करेंगे और फिर इन गणनाओं को अन्य देशों फ्रांस, ब्रिटेन, यु.एस.ए., मलेशिया, थाईलैंड, मिस्र, कनाडा, जर्मनी के बच्चों की गणनाओं के साथ मिला कर प्राचीन रोमन विधि से गणितीय सूत्रों की सहयता से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जायेगी और प्राप्त परिणामों को पृथ्वी की स्टैंडर्ड परिधि ४००७५ किलोमीटर से तुलना करके प्रयोग की प्रमाणिक जांच की जायेगी।
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| कार्यशाला का आयोजन |
इस प्रयोग के पहले चरण में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस प्रयोग के दूसरे चरण में उपकरणों का निर्माण किया गया।
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| पूर्वाभ्यास |
इस प्रयोग के तीसरे चरण में पृथ्वी प्रयोग किया जाएगा।
अंतिम चरण में सभी देशों के बच्चे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये आपसी संवाद स्थापित करेंगे।
कार्यशाला में दर्शन लाल, संजय शर्मा, मुकेश रोहिल व निशा काम्बोज मुख्य प्रशिक्षक थे।
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14 प्रतिक्रियाएँ:
ऐसे प्रयोग बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करते हैं और उनमें आत्मविश्वास की वृद्धि करते हैं।
डॉ.रजनीश सही कहना है कि ऐसे प्रयोग वैज्ञानिक दृष्टिकोण का निर्माण करते हैं। वैज्ञानिक विधि सीखाने का यह अच्छा तरीका है। उस प्रयोग में कई विद्यालयों को सम्मिलित करते तो सोने पर सुहागा होता।
विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी, पाली (राजस्थान) 306401
बधाई के पात्र हैं यह बच्चे इन्हें सुयोग्य शिक्षक का आधार मिला अच्छी बुनियाद विज्ञान को करके देखने समझने की मिल रही है .
धन्यवाद
आज इस प्रयोग का पूर्वाभ्यास किया गया
धन्यवाद
आज इस प्रयोग का पूर्वाभ्यास किया गया
बढ़िया पोस्ट!
कल बुधवार की चर्चा में चर्चा मंच पर इस पोस्ट का लिंक ले लिया है!
दर्शन जी इस अधूरी जानकारी के लिये अधूरा सा धन्यावद क्या ही अच्छा होता अगर आप प्रयोग विधी साथ मे देते तो इसका फायदा ओर बच्चों को भी होता शायद वो भी इस प्रोजेक्ट के साथ काम कर अपने को खुशी देते....एसे प्रयासों की हम खुले दिल से सराहना करते है. इसके लिये इस मंच को भी धन्यवाद
दर्शन जी धन्यवाद. आगे ओर भी मोके आयेगे पूरी जानकारी देकर लोगों को इस कार्य के साथ जोडे. सिर्फ समाचार से काम नही चलेगा.
आज ज्ञान पेट से जुडा है. आपकी कोशिश शायद इसे मन और दिमाग और दिल से जोड सके. परिक्षा मे रट कर अच्छे नंबर लाने से ज्यादा जरूरी है विषय को समझकर इसे जन कल्याण के उपयोग मे लाना....आपकी पहल इस दिशा एम अच्छा कदम है
बहुत सुन्दर ! बच्चो में प्रक्टिकल अप्रोच का होना बहुत जरूरी है !
वाह एक अच्छी जानकारी -एक ब्लॉग पोस्ट की सीमा में इससे अधिक की अपेक्षा क्यों ? यह तो उत्सुकता जगाने भर के लिए है!
बहुत बढ़िया लगा! अच्छी और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई!
मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
http://seawave-babli.blogspot.com/
दुर्वेश जी
धन्यवाद
पोस्ट पर जहां देखें लिखा है वहाँ पर यानी उस लिंक पर जाने से आपको और जानकारी मिल जायेगी
पोस्ट को ध्यान से पढ़ना चाहिए और दिए गए सारे लिंक देखने चाहियें
प्रयोग २२ दिसम्बर को किया जाना है
दर्शन लाल जी आपका यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है
विज्ञान में रुची जगाने वाले इस प्रयास हेतु शुभकामनाएं.
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