सेलेब्रिटी कल्चर जो करादे सो कम.
सेल्फ इमेज, गुड लुक्स, देह यष्टि का आकर्षण और मन्त्रमुग्धता अब प्राइमरी स्कूल की उम्र में ही रहने लगी है. एक बेचैनी इनमे "कैसी दिखती हूँ मैं" यानी अपनी छवि को लेकर साफ़ मुखरित हो रही है. कुछ भी करने को तैयार हैं इसके लिए ये लडकियां. १०-११ साल के दरमियान ही ये तौल के फंदे में फंसी तौल घटाने की जुगत में बेचैन रहतीं हैं.
स्कूल हेल्थ एज्युकेशन यूनिट ने संपन्न किया है यह अध्ययन. जिन ८३,००० लड़कियों से इस अध्ययन के दौरान बातचीत की गई उनमे से एक तिहाई दस साला लड़कियों ने यह साफ़ साफ़ बतलाया वह तौल कम करने के लिए नाश्ता ही नहीं करतीं हैं. बातचीत से पहले दिन २४%लड़कियों ने दोपहर का भोजन भी नहीं लिया था. जैसे जैसे लड़कियों की उम्र आगे खिसकती जाती है यह प्रतिशत भी उम्र के साथ साथ पींग बढाता है.
१४-१५ साला लड़कियों में से दो तिहाई वजन कम करना चाहतीं हैं. एक ख़ास लुक के लिए कुछ भी करेगा. कई किस्म के पापड बेलेगा. यही फलसफा है इनका इरादा भी है. कक्षा छ: की तमाम लड़कियों और लड़कों में से भी ४०% ने बतलाया- हम सप्ताह के सातों दिन प्रोटीन का सेवन ही नहीं करतें हैं. लेकिन इनमे से एक चौथाई crisps, sweets और chocolate बराबर खातें हैं.
ब्रितानी न्यूट्रीशन फाउनदेशन की साइंसदान Dr Laura Wyness कहतीं हैं यह सब जनप्रिय मीडिया का करा धरा है. पोप्युलर मीडिया बेतरह युवा भीड़ की बॉडी इमेज को प्रभावित कर रहा है. इसी के चलते एक जद्दोजहद एक दवाब आदर्श कद काठी, छवि आइडियल बॉडी शेप को लेकर बन रहा है. इसी फेड के चलते प्रेशर के तले कुचले जाने से सेहत को चौपट करने वाली आदतें पनप रहीं हैं. इनमे शरीक हैं- धूम्रपान, खाना परहेजी, स्किप्पिंग मील्स, खासकर नाश्ता न करना, दूध और दुग्ध उत्पादों से छिटकना. प्रोटीन के अन्य प्रमुख स्रोतों यथा रेड मीट यहाँ तक की आयरन, जिंक और केल्शियम से भी छिटकाव बढ़ रहा है. लो एनर्जी और कथित न्युत्रीयेंट डाईट का चलन ज़ोरों पर है. सेलेब्रिटी कल्चर इस दौर में जो करादे सो कम.
माँ बाप को ऐसे घटाटोप में क्या करना चाहिए ?
सन्दर्भ-सामग्री: Even 1o 0-yr -olds starving themselves to stay thin 'No Breakfast For 30%Girls, 24%Skipped Lunch' /TIMES TRENDS/TOI, OCTOBER 31 ,2011 P23 CAPITAL ED.


7 प्रतिक्रियाएँ:
ज्यादातर सेक्सी दिखना चाहती है तभी तो वजन घटाने पर तुली हुई है, पहले जीब की चटौरी बनेगी, बाद में उसका फ़ल भुगतना ही होगा।
ladko me bhi yae sab prachlan haen
khaas kar steroids laekar body building kaa
gym me yahii sab hotaa haen
उफ, ये फैशन जो न करवाए....
बिलकुल है .लड़कों में भी यह सब .सवाल यहाँ जेंडर भेद का नहीं है .बे -हूदगी का है .अपनी ही सेहत के साथ खिलवाड़ का है .सुदर्शन कुमार और सुदर्शन कुमारी/सुदर्शना दिखने की होड़ ही यह सब करवा रही है .
फैशन कि होड़ के चलते लोग जजो करें वो कम ही है॥ समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
दुनिया इसी से सुंदर है ...
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