
विज्ञान प्रसार, नेशनल बुक ट्रस्ट एवं तस्लीम के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 26 एवं 27 दिसम्बर को लखनऊ में 'क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन' (दो दिवसीय कार्यशिविर) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश के चर्चित विज्ञान कथाकार एवं विज्ञान लेखक भाग ले रहे हैं। इस कार्यशिविर के विस्तृत कार्यक्रम को देखने के लिए कृपया यहाँ पर क्लिक करें।
इस उपलक्ष्य में लखनऊ से प्रकाशित साहित्यिक अभिरूचि सम्पन्न दैनिक 'जनसंदेश टाइम्स’ ने अपने रविवारीय परिशिष्ट को विज्ञान कथा पर केन्द्रित किया है। इसे ऑनलाइन देखने के लिए कृपया इस लिंक का प्रयोग करें।
परिशिष्ट में इस नाचीज के द्वारा हिन्दी विज्ञान कथा के 100 सालों के सफर को आलोचनात्मक नजरिये से देखने का प्रयास किया गया है और यह जानने का प्रयत्न किया गया है कि आखिर 100 सालों का सफर पूरा करने के बावजूद अभी भी हिन्दी विज्ञान कथा अपनी पहचान के लिए क्यों जूझ रही है। इस लेख को अलग से पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक का प्रयोग करें।
परिशिष्ट में विज्ञान कथा की दशा एवं दिशा पर चर्चित विज्ञान कथाकारों की सम्मतियाँ भी प्रकाशित की गयी हैं। उन विचारों को जानने के लिए इस लिंक का उपयोग किया जा सकता है।
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4 प्रतिक्रियाएँ:
Jankari ke liye Aabhar.
Krishna Rawat, Atarra.
(मेल से प्राप्त)
बधाई इस उपलब्धि के लिए .लिंक्स मुहैया करवाने के लिए .बड़ा दिन मुबारक नव वर्ष की पूर्व वेला भी .शुक्रिया आपका निरंतर उत्साह वर्धन के लिए .ईसामसीह का जन्म दिन मुबारक .नव वर्ष की पूर्व वेला शुभ हो .
बधाई इस उपलब्धि के लिए
इस प्रयास हेतु शुभकामनाएं.
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