हमारी देह यष्टि का आधार भूत ढांचा हमारा कंकाल अस्थियाँ (हाड़, हड्डियां) ही खडा करतीं हैं. युवावस्था में किशोर और बालपन में हमारे द्वारा लिया गया खुराकी कैल्शियम ही उम्र दराज़ होने पर उनकी ताकत बनता बतलाता है. इसीलिए सभी उम्र के लोगों के लिए मख्खन और फुल क्रीम से ज्यादा उपयोगी समझा गया है छाछ (मठ्ठा, बटरमिल्क, सपरेटा दूध और केला). अस्थि विज्ञान के माहिरों और हमारे स्रावी तंत्र के माहिर एंडोक्रैनोलोजिस्त भी ऐसी ही सिफारिश करते हैं.
आखिर अस्थियाँ हमारा चल आधार हैं, हमें चलाती फिरातीं हैं एक स्थान से दूसरे तक सुरक्षित ले जातीं हैं हमारी मोबिलिटी की बुनियाद हैं. एक समय था जब समझा जाता था अस्थियाँ एक बार बन गईं सो बन गईं आगे उनमे कोई रद्दोबदल तरमीम या सुधार मजबूती नहीं आती है. लेकिन माहिरों के अनुसार बोन्स में तबदीली आती है. हमारा खानपान इनकी सेहत को असर ग्रस्त करता है. हमारी बढ़वार के दौर में हम कितना खुराकी केल्शियम लेतें हैं कितना धूप में निकलते हैं कमर हाथ और बाजुओं को सूर्य स्नान कराते हैं वह हमारी अस्थियों के स्वास्थ्य में विधाई भूमिका निभाता है. आखिर कैल्शियम की शरीर द्वारा ज़ज्बी में विटामिन-डी का भी एक बड़ा रोल होता है जो सूरज की रौशनी की मौजूदगी में हमारी चमड़ी के नीचे बनता है.
विशेष:
दूध और दुग्ध उत्पाद, फिंगर मिलेट (बाजरा, ज्वार), टोफू और तिल का तेल, Sesame seeds, कैल्शियम के खुराकी सम्पूरण के बरक्स कैल्शियम की निरापद भरपाई और पोषण मुहैया करवातें हैं.
कैल्शियम की हमारी अंतड़ियों द्वारा बेहतर ज़ज्बी के लिए इसे भोजन के साथ ही लिया जाना चाहिए. चाय कॉफी के साथ कैल्शियम की गोलियां, कैल्शियम सम्पूरण न लें. अलबत्ता दूध के साथ ले सकते हैं. कैल्शियम की बेहतरीन ज़ज्बी के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार बीस मिनिट तक अपनी कमर, हाथ (फॉर आर्म) और बाजुओं को धूप खिलाइए.
शाकाहारी खुराक से विटामिन डी की आपूर्ति नहीं हो पाती है.
फिश तथा फिश आयल (तेल वाली मछली, मछली का तेल), विटामिन डी साम्पूरण तथा इससे पुष्टिकृत खाद्य विटामिन डी का स्रोत हैं. यदि धूप नहीं खाते हैं आप या कमतर एक्सपोज़र मिलता है सन का तब इन्हें आजमाएं.
याद रहे- ज़रुरत से ज्यादा धूप खाना भी ठीक नहीं है. स्किन कैंसर की वजह बन सकता है. सन बर्न्स की भी.
धूप में बैठने उठने पर चमड़ी के लाल हो उठने का मतलब है पर्याप्त उद्दीपन और इरादियेशन मिल गया सौर विकिरण का आपको. अब और नहीं चाहिए आपको सन एक्सपोज़र.
क्या आप जानतें हैं बुढापे में अस्थि भंग, हड्डियों के टूटने का कितनी प्रबलता से आप मुकाबला कर पातें हैं यह आपकी हड्डियों में मौजूद कैल्शियम ही तय करता है. शिशु काल, किशोरावस्था में खुराक में कैल्शियम की कमी-बेशी रह जाने से अस्थियों में भी इसका ज़माव और सांद्रण कम रह जाता है.
जंक फ़ूड कबाड़िया बासा चिकनाई डूबा सना भोजन स्थिति को बद से बदतर बना देता है. उम्र के साथ अस्थियों से यूं भी कैल्शियम के भण्डार रीतने लगते हैं. बोन मॉस का क्षय होने पर अस्थि भंग भी होने लगता है. कमज़ोर अस्थियाँ भुर्भुरा के उठते बैठते भी टूटने लगतीं हैं.
बुढापे में अस्थियों की मजबूती इस बात से तय होती हैं हमारी अस्थियाँ बीसम बीस और तीसम तीस के दौर में कितनी पुष्ट थीं. इस उम्र में कैल्शियम का हाई इंटेक, अतिरिक्त सेवन नान-ट्रौमा रिलेटिड बोन फ्रेक्चर के खतरे के वजन को भी कम करता है.
औरतों में पहले अस्थि क्षय और फिर अस्थि भंग की शुरुआत उनके रजोनिवृत्त होने पर ही शुरु होती है. रजस्वला बने रहने पर, मासिक चक्र के ज़ारी रहते इस्ट्रोजन अस्थि क्षय (लोस ऑफ़ बोन मॉस) से अपेक्षाकृत बचाए रहता है. मिनोपौज़ के बाद यह हिफाज़ती नेमत कुदरत की चुक जाती है.
अस्थियों में कैल्शियम की कमी बेशी (ओश्तियोपोरोसिस) चलने फिरने को भी मुश्किल-भरा, कष्टकारी जोखिम पूर्ण बना देती है. मानसिक सदमा भी पहुँच सकता है इसका. दिल को ठेस भी लगती है जब उठते बैठते भी अस्थि भंग का डर सालता रहता है.
कैसे जाने अस्थियों का हाल?
प्रश्नोत्तरी भरवाई जाती है.स्पेशल एक्स रेज़ से जाच परख भी क़ी जाती है, बस अस्थि भंग के जोखिम का पता चल पाता है. यह आपके स्वास्थ्य का यह एक एहम पहलू है. क्या इसे नजर अंदाज़ कीजिएगा?


9 प्रतिक्रियाएँ:
बड़े काम की बातें हैं।
काम की जानकारी ....
Behtreen jaankaari di aapne...
बहुत बेहतरीन व काम की जानकारी
Gyan Darpan
Matrimonial Site
must known spacialy for persons over 40's..
beah kaam ki janakari dene ke liye abhaar ...
महिलाओं को इसके प्रति विशेष रूप से सतर्क रहने की जरुरत है ...बहुत सी महिलओं में शरीर और जोड़ों के पीछे विटामिन डी की कमी होती है -बाजार में विटामिन डी३ मिलता है जिसे कैल्शियम टैबलेट के साथ खाया जा सकता है !
आजकल कम उम्र के बच्चों में भी अस्थिरोग की समस्याएं देखी गई हैं। कारण जैसा आपने बताया, गलत खानपान ही प्रतीत होता है। बढि़या जानकारी।
"आखिर अस्थियाँ हमारा चल आधार हैं, हमें चलाती फिरातीं हैं एक स्थान से दूसरे तक सुरक्षित ले जातीं हैं हमारी मोबिलिटी की बुनियाद हैं"
----भैया चल आधार तो मांस-पेशियां होती हैं जो अस्थियों को चलाती हैं , गति देती हैं....
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