अब मानव श्वसन प्रक्रिया से बनेगी बिजली (ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ते नये आयाम )

(Graduate Student Jian Shi and Materials Science and Engineering Assistant Professor Xudong Wang demonstrate a material that could be used to capture energy from respiration.)

ऊर्जा का बढता प्रयोग आज हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा बन गया है . हमारे दैनिक जीवन के अधिकतर काम आज के समय में बिजली से चलने वाले यंत्रो की मदद से किये जाते है.इसलिए ऊर्जा का अपना एक विशेष महत्व है . जिसको बनाने के लिए तरह तरह के साधन और तकनीको को विकसित किया जा रहा है. जिनमे बड़े स्तर नदियों पर बाँध बनाकर बिजली उत्पन्न करना तो पहले से ही है . इसके अतिरिक्त बड़े स्तर पर नाभिकीय रिएक्टर बनाकार परमाणु ऊर्जा के द्वारा बिजली उत्पन्न करना भी एक अहम् कदम है . अगर हम छोटे स्तर पर बात करे तो , बिजली बनाने के लिए डीजल इंजन , पेट्रोल इंजन आदि भी बनाए गये. और साथ ही साथ सेल बेटरी बनाकर रासायनिक क्रिया द्वारा बिजली बनाना भी आम तौर पर प्रयोग होता है.

धीरे धीरे फिर बारी आई सौर ऊर्जा की मानव ने सूरज की रौशनी क़ा प्रयोग करके भी बिजली बना डाली . इतने सब आविष्कार किये गये बिजली को बनाने के लिए फिर भी आज इसकी कमी महसूस होती है . अगर हम और भी अडवांस टेक्नोलोजी पर बात करे तो अभी हाल ही में कुछ वैज्ञानिको ने आदमी के चलने से भी ऊर्जा उत्पन्न करने क़ा रास्ता बना डाला पर वो बहुत ही कम क्षमता बाली ऊर्जा को उत्पन्न करने के लिए था . इतना ही नहीं ऊर्जा के उत्पादन के लिए अभी हाल ही में एक वैज्ञानिक ने एक कृत्रिम पत्ति को भी बनाया जिसकी मदद से हाईड्रोजन और ऑक्सीजन के बुलबुलों को केमिकल इंधन में बदला और बिजली उत्पन की. इसी क्षेत्र में एक सफलता अभी हाल ही में विस्कॉन्सिन-मेडिसन यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने हासिल की है , जिन्होंने मानव की सांस लेने मतलबश्वसन प्रिक्रिया द्वारा बिजली बनाने क़ा दावा किया है .कितना रोचक है ना नाक से बिजली उत्पन्न करना .

इस क्रिया द्वारा नाक से बिजली उत्पन करने के लिए इसमें कुछ विशेष प्रकार के विद्युत सेंसर नाक में लगाए जाएंगे जिससे सांस लेते समय ऊर्जा पैदा होगी. इस क्रिया के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास ‘माइक्रोबेल्ट’ बनायी है है जो हल्की सी भी हवा के गुजरने से कंपन करती है, इंजीनियरों की टीम के प्रमुख प्रोफेसर जूडॉन्ग वांग ने बताया कि पॉलीविनायलीडीन फ्लोराइड (पीवीडीएफ) यंत्र जो इस क्रिया में प्रयोग होता है मामूली से यांत्रिक दबाव से ऊर्जा का उत्पादन करने लगता है .इस प्रक्रिया को पीजोइलेक्ट्रिक इफेक्ट कहा ज़ाता है . प्रोफ़ेसर वांग के अनुसार शरीर के किसी भी हिस्से में जहां पर यांत्रिक दबाव का क्षेत्र बनता है वहां पर इस तकनीक का प्रयोग कर बिजली पैदा की जा सकती है, नाक और चेहरे पर लगाई जाने वाली ये तकनीक माइक्रोवाट में बिजली पैदा करने में क्षसम है जिन्हें नैनो टेक्नोलॉजी आधारित प्रक्रिया से बनाए गए छोटे-छोटे जनरेटर की मादा से कहीं भी सप्लाई किया जा सकता है .

इसका सबसे बड़ा लाभ मेडिकल साइंस में होगा जहा पर इसकी मदद से आदमी की धड़कन, ब्लड प्रेशर, शुगर, पेसमेकर बैटरी की स्थिति का सही-सही पता चल सकेग वही पर साथ ही साथ पेसमेकर बैटरी चार्ज भी हो जाएगी और उसे बदलने का झंझट खत्म होगा .प्रोफ़ेसर वांग के अनुसार इसमें प्रयोग होने वाला पीवीडीएफ शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाता है , और यह एक बेहद छोटा यंत्र है, जो शरीर में कहीं भी लगाया जा सकता है. अगर ये तकनीक सफल होती है तो इसके सफल होने से आगे चलकर ऊर्जा उतपादन करने के क्षेत्र में मानव शरीर में खून के प्रवाह, गति, शरीर के तापमान पर आधारित नई विद्युत उत्पादन वाली तकनीको को बनाने में भी सफलता हासिल हो सकेगी .इस तकनीक की जायदा जानकारी आप "एनर्जी एंड एनवायरमेंटल साइंस जर्नल" में प्रकाशित हुई इसकी एक रिपोर्ट से ले सकते है या फिर विस्कॉन्सिन-मेडिसन यूनिवर्सिटी की वेब साईट से भी ले सकते है .

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4 प्रतिक्रियाएँ:

"जाटदेवता" संदीप पवाँर said...

गजब हो जायेगा

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

वेरी इंट्रेस्टिंग।

दर्शन लाल बवेजा said...

कमाल है और क्या क्या बनाना बाकी है

veerubhai said...

अच्छी खबर है रोचक और बहु -उपयोगी भी अलबत्ता वर्तनी की अशुद्धियाँ खटकती हैं .(सक्षम कर लें क्षकसम के स्थान पर ,मदद शब्द भी ठीक कर लें .).

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