आवर्त सारण में 3 नए तत्व शामिल।
(3 New elements added to Periodic Table):
आवर्त तालिका में तीन नए तत्व जुड़े हैं जिनमे से एक का नामकरण मशहूर खगोलज्ञ निकोलस कोपरनिकस (Nicolaus Copernicus)के नाम पर हुआ है .इन नामों को प्युओर एंड एप्लाइड फिजिक्स के अंतरराष्ट्रीय संघ ने अनुमोदन प्रदान कर दिया है. आवर्त तालिका में इनका क्रमांक या सीट नंबर 110, 111 और 112 है. इन्हें Darmstadtium (Ds), Roentgenium(Rg), तथा Copernicium (Cn) नाम दिया गया है.
आम सभा के कुल 60 सदस्य हैं. इनकी राष्ट्रीयता जुदा है .लन्दन के भौतिकी संस्थान में संपन्न हुई थी आम सभा की वह बैठक जिसमे इन तत्वों का नामकरण आम सहमती से किया गया था .अखबार डेली मेल ने इसका पूरा ब्योरा उपलब्ध करवाया है.
बेशक इन तत्वों को इन नामों से आवर्त तालिका में दाखिला अब मिला है लेकिन इनकी खोज पहले कॉफ़ी हुई थी. वैज्ञानिक संगठन ही नए आविष्कृत तत्वों को औपचारिक तौर पर नया नाम देतें हैं. मसलन यूनिवर्स टुडे के अनुसार कोपर्निशियम की खोज तो 9 फरवरी 1996 में ही कर ली गई थी लेकिन इसका मूल नाम अनंबियम (ununbium) अब से दो साल पहले तक बना रहा है. जर्मन साइंसदानों ने इसे खोजा था.
सन्दर्भ-सामग्री:-3 new elements added to Periodic Table /SHORT CUTS/TIMES TRENDS/TOI/NOVEMBER 7,2011 ,New-Delhi Ed.P-15.
क्या क्वांटम भौतिकी किलोग्राम वेट पर मंडराए संकट को हल कर सकती है?
(Can quantum physics solve kilogram's weight crisis?)
Standards of weights and measure के संरक्षक इन दिनों क्वांटम भौतिकी के अनोखे सूक्ष्म जगत की और निहार रहें हैं इस उम्मीद से कि शायद द्रव्यमान (मॉस) की अंतर-राष्ट्रीय मानक इकाई "KILOGRAM"पर मंडराते संकट को भौतिकी की यह शाखा हल कर सके. हुआ यह है कि किलोग्राम अपनी साख खोता प्रतीत हो रहा है.
पेरिस के एक उपनगर में एक ऐसा सिलिंडर सुरक्षा मानकों के अनुरूप रखा गया है जिसकी ऊंचाई उसके व्यास या डायमीटर के बराबर रखी गई है. यह बेलन मिश्र धातु से तैयार किया गया है जिसमे 90%प्लेटिनम तथा 10%इरिडियम शामिल है. इसका वजन 1889 में अंतर-राष्ट्रीय तौल और माप जोख से ताल्लुक रखने वाली मानक संश्था BIPM (International bureau of weights and measures) ने एक किलोग्राम घोषित किया था. समझा जाता था यह तौल का ऐसा आलमी मात्रक या वजन तौलने की एक ऐसी अंतर-राष्ट्रीय इकाई है जो सर्वकालिक और सार्वत्रिक है जिसमे स्थान और काल के साथ किसी भी किस्म का बदलाव दर्ज़ नहीं होगा. अब पता चला है यह अपनी साख खो रहा है.
1992 में यह इल्म हुआ गत सौ सालों में इस मानक में 50 माइक्रोग्राम का फर्क पैदा हो चुका है. वैज्ञानिक कार्यों में जिस प्रकार की शुद्धता की दरकार होती हैं वहां इस त्रुटी के लिए कोई जगह नहीं है. अलबत्ता वह व्यक्ति जो एस्पिरिन की 500 मिलीग्राम की टिकिया रोज़ लेता है उसके लिए इसके कोई मायने नहीं है न ही उस व्यक्ति के लिए यह 50 माइक्रोग्राम का फर्क कोई मायने रखता है जो सब्जी वाले से आधा किलोग्राम गाज़र खरीद रहा है. 50,000 टन के लड़ाकू समुद्री जहाज़ के लिए भी यह फर्क कोई मायने नहीं रखता. लेकिन शोध से जुड़े प्रयोगशाली मापों में इसे नजर अंदाज़ नहीं किया जा सकता है. वहां तो अति शुद्ध माप जोख क्या परम शुद्धता चाहिए.
बेशक शून्य दशमलव चार (0.4 मिलीमीटर डायमीटर) का रेत का एक कण इतना भार लिए होगा.
बेशक अभी यह पता नहीं चला है कि यह ५०माइक्रोग्राम खो चुका है या इसमें 50 माइक्रोग्राम का इजाफा हुआ है जबकी यह एक "Strongbox" पूरी चौकसी और हिफाज़त के साथ रखा हुआ है.
गौर तलब है GMT यानी ग्रीनविच मीन टाइम भी पुनर-परिभाषित होने जा रहा है क्योंकि पृथ्वी एक अच्छी घडी नहीं है इसकी चाल कभी कम होती है कभी ज्यादा. परमाणु की धड़कन, कोई परमाणुविक मानक समय के मापन को नया सन्दर्भ मुहैया करवा सकता है. सीजियम सेकिंड तो पहले से है ही.

9 प्रतिक्रियाएँ:
कल 27/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!
abhar.
abhar.
इन महत्वपूर्ण जानकारियों को शेयर करने के लिए आभार।
विज्ञान परिवर्तन ओर सत्य के खोज का ही नाम है...इसलिए ये खतरे बने ही रहेंगे...बेहद उपयोगी जानकारी ..प्रदान करने वाला आलेख...सादर
उपयोगी जानकारी.
वीरू भाई बहुत अच्छी जानकारी देतें हैं आप.
हलचल में आपकी पोस्ट को देखकर खुशी मिली.
समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.
राम राम जी.
वीरू जी,...
बहुत अच्छी जानकारी दी आपने,...
मेरे पोस्ट 'वजूद'में आइये स्वागत है
बहुत ही बढ़िया और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई! धन्यवाद!
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