![]() |
| अरे बाबा स्टारवार के इस दृश्य जैसा कुछ नहीं दिखेगा |
![]() |
| दैनिक जागरण, 25 जनवरी, 2011 |
मगर बैड अस्ट्रोनामी ब्लॉग के स्वामी फिल प्लेट ने कहा है कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है -कथित तारा धरती से कोई ६०० प्रकाश वर्ष की दूरी पर है -हाँ अगर इसमें हुए विस्फोट से धरती पर रोशनी आयेगी भी तो वह सूरज की चमक के एक लाख गुना असे भी कम होगी क्योकि यह बहुत दूर है .हाँ यह पूर्ण चन्द्र सरीखा दिख सकता है और इसे नंगी आँखों से देखना नागवार लग सकता है ....वैसे भी ६०० प्रकाश वर्ष दूर तारे से यहाँ प्रकाश के यहाँ तक पहुँचने में ६०० वर्ष लगेगें ..इसका मतलब है कि इसमें विस्फोट ६०० वर्ष पहले हो गया होगा तभी यह अब दिखेगा ..मुझे कहीं से यह पक्की खबर नहीं मिल पा रही है कि इसमें विस्फोट हुआ भी है ..तब तक दिल थाम कर बैठते हैं ....
उन्मुक्त जी के इस लेख में और जानकारी है.
सुपरनोवा के बारे में विज्ञान विश्व के इस लेख में पढ़ें
| अगर आपको 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ। |
|---|



19 प्रतिक्रियाएँ:
आपका कहना सही लगता है.
फिलहाल वेट एंड वाच ही करना होगा.
सादर
आजकल विज्ञान में भी संतों—बंतों की भरमार हो गई है :)
वेट एंड वाच
किसी को पता नहीं के दुनिया कब ख़तम होगी । इस लिए जयादा तेंशिओं मत लो ऐश करो दोस्त ऐश
-|->मिनिस्टर का लड़का फ़ैल हो। क्या वो मिनिस्टर उसे गोली मार देगा ? क्लिक कीजिये और पढ़िए पूरी कहानी और एक टिपण्णी छोड़ देना।
फील प्लेट का बैड अस्ट्रोमी ब्लॉग मेरे पसंदीदा ब्लोगों में से एक है ! फील सूडो(Pseudo) विज्ञान की धज्जीया उड़ाने के लिए विख्यात है ! उनकी पुरानी साईट(http://www.badastronomy.com/index.html) भी काफी अच्छी है !
क्या बाह्य अंतरिक्ष मे जीवन है ? :परग्रही जीवन श्रंखला
बहुत सारे लोग मीडिया की इस खबर से खौफ खाएं हैं,जगह -जगह इस बात की चर्चा होती रही.
दुनिया को खत्म होना ही होगा तो आप क्या उखाड लेंगे--जो सब करेंगे वही आप भी ..तो क्या चिन्ता...
----वैसे कितना अच्छा हो यदि आधुनिक विग्यान वाले नये सूरज को प्रिथ्वी की रात के समय चमकायें----न रात न अन्धकार ..सारी दुनिया एक समान...क्या गज़ब की समता समानता होगी...
डर दिखा दिखा कर अपनी जेब गरम करने वालो पर यह तमाचा है
जाकिर भाई आपका शुक्रिया सही तथ्य सामने लाने के लिए
http://haridhari.blogspot.com/2011/01/blog-post_23.html
सही कहा आपने, अगर आज कल में विस्फोट हो भी रहा होगा, तो भी यह 600 साल बाद ही दिख पाएगा।
हमें तो यह science फंतासी लगती है.
देखते हैं क्या होता है ...:)
विज्ञान पत्रकार कैसे काम करते है !
एक मजेदार कार्टून
देखते है
अपने क्रियाकलापों से आदमी खुद ही कर देगा यह काम तो
Kuch bhi ho par hume apne dainik karyo ko bina kisi dar ke karte rahna chahiye.
yes it wont affect earth but it will be great day for science
आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
सादर
------
गणतंत्र को नमन करें
अब विग्यान मे भी ज्योतिश की तरह भविश्यवाणियाँ गलत साबित हो रही हैं। धन्यवाद इस जानकारी के लिये। आपको गनतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।
ये आपसे किसने कहा की आज कल में विस्फोट होगा, विस्फोट तो ६४० वर्ष पूर्व हो ही चुका है, जो हमें आज दिखेगा, ऐसा कहा जा रहा है टीवी पर
ये तो ज़रा सी जानकारी रखने वाला बच्चा भी बता सकता है, की अंतरिक्ष में सब का समय अलग अलग होता है.
वैसे मेरे हिसाब से इतनी दूर के तारे के विस्फोट के बारे में पता करने का कोई पुक्ता तरीका नहीं है, बस यही है कि वहाँ से आती हुई रौशनी की किरणों को देखें और अनुमान लगाएं की वो तारा अपनी किस स्थिति में है.... इस से ज्यादा आप कुछ नहीं कर सकते, क्यों के अगर प्रकाश को आने में ही ६०० वर्ष लग रहे हैं, तो दुनिया कि कोई तकनीक, उस से ज्यादा तेज जानकारी तो नहीं दे सकती आपको, उस तारे के बारे में...
और हाँ, रही बात २०१२ की, तो भई मैं तो बहुत भयभीत हूँ, सुना है, धरती में बहुत बड़े बड़े भूकंप आयेंगे.
और कुछ हफ्ते पहले ही अमेरिका ने एक हवाई अड्डा बंद किया है, कारण ये बताया गया है की उस जगह पर हवाई जहाज़ को दिशा जानने में दिक्कत हो रही थी, क्यों की उत्तरी ध्रुव ४० मील प्रति वर्ष की गति से खिसक रहा है, और ये भी अफवाह उड़ रही है की २१ दिसंबर २०१२ को दोनों ध्रुव अपनी जगह बदल लेंगे, और तब भयंकर तबाही होगी.... और हम सब मर जायेंगे :(
प्रलय की भविष्यवाणी झूठी है-ये दुनिया अनूठी है शीर्षक लेख में मैंने इस पर विस्तार से प्रकाश डाला है.
Post a Comment