| डॉ मनोज पटैरिया का संबोधन, डायस पर अरविन्द मिश्र,सत्र अध्यक्ष- हेमंत कुमार और साईंस ब्लॉगर अल्पना वर्मा |
| बाएँ से रवीन्द्र प्रभात, हेमंत कुमार, डॉ0 पटैरिया, अल्पना वर्मा |
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, नई दिल्ली (भारत सरकार) और तस्लीम, लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, 'ब्लॉग लेखन के द्वारा विज्ञान संचार' विषय 5 दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन का पहला सत्र जारी है। इस कार्यक्रम में यूएई से आईं साइंस ब्लॉगर एसोसिएशन की सक्रिय सदस्या सुश्री अल्पना वर्मा विज्ञान विषयक लेखन पर अनुभव बाँट चुकी हैं। उन्होंने विज्ञान शिक्षिका होने के नाते अपने विज्ञान संचार के दायित्वों को अच्छी तरह समझने और इस प्रक्रिया की चुनौतियों की चर्चा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान ब्लॉगों को बिना रूचिकर बनाए हम आमजन से संवाद कायम नहीं कर सकते।
| कार्यशाला के प्रतिभागीगण |
सत्र की शुरूआत में शैलेष भारतवासी ने अपने पॉवर प्वाइंट प्रेजेन्टेशन के जरिए ब्लॉग शिडयूलिंग, पॉडकास्टिंग, वीडियो अपलोडिंग आदि तकनीकी औजारों और प्रक्रिया का डेमो दिया। इस सत्र का विशेष आकर्षण था, डा0 मनोज पटैरिया, निदेशक, एन सी एस टी सी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा दिया गया विशेष सम्बोधन, जिसमें उन्होंने विज्ञान संचार के बहुआयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज भी विश्व में कहीं तो सूचना एवं ज्ञान की कमी (इनफार्मेशन एण्ड नॉलेज डेफसिट) है, तो कहीं ज्ञानका बाहुल्य (नॉलेज अबेन्डेन्स) भी है।
अन्तर्जाल की दुनिया ज्ञान के बाहुल्य की दुनिया है। इसलिए यहाँ ज्ञान के खोजियों को दुविधा की स्थिति का भी अनुभव करना पडताहै। क्योंकि उन्हें सब तरह की जानकारियां तो मिल जातीहैं, लेकिन प्राय: काम की जानकारियां, जिसे वे खोज रहे होते हैं, नहीं मिल पाती है। उन्होंने इसी संदर्भ में डिटिजल विभेद की भी चर्चा की, जो आज भी तीसरी दुनिया के देशों के लिए एक चुनौती है। उन्होंने कार्यशाला में भाग ले रहे ब्लॉगरों का आह्वान किया कि वे इस ज्ञान के अंधकार को अपने प्रयासों से दूर करेंगे और साइंस ब्लॉगर्स वालंटियर की भूमिका भी निभाएंगे।
| खाते खाते विज्ञान संचार की बातें |
डा0 पटैरिया ने विज्ञान के ब्लॉगों के कन्टेन्ट की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता का भी मुद्दा उठाया और प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि वे इस ओरविशेष ध्यान दें। उन्होंने ब्लॉग कंटेन्ट को आकर्षक बनाने केलिए उन्हें और कौतुहलपूर्ण बनाने के साथही समर्पित पाठक समूहों को तैयार करने, अपने प्रस्तुतिकरण को सुधारने आदि दिशाओं की ओर सचेष्ट रहने का भी आवाहन किया। उन्होंने कहा कि ब्लॉग लेखन अन्य कई शौक/उत्तरदायित्वों की तरह बहुत खर्चीला व्यसन नहीं है और 'पेपर फ्री' प्रासेस होने के कारण वृक्षों की रक्षाके पर्यावरणीय अभियान को भी यह समर्पित कर रहा है।
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि एक फोरम पर कई संगठन जैसे 'लखनऊ ब्लॉगर्स असोसिएशन', 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन', 'तस्लीम', 'इंडियन सोसाइटी ऑफ साइस कम्युनिकेशन', 'अवध रिसर्च फाउंडेशन' ने विज्ञान ब्लॉगिंग के लिए समन्वित सहयोग किया और फलस्वरूप एक सफल साइंस ब्लॉगिंग कार्यशिविर का आयोजन सम्भव हो सका। इसके समन्वित सहयोग से विज्ञान संचार क्लबों, साइंस ब्लॉगर क्लब इत्यादि के जरिए विज्ञान संचार को एक मुहिम दी जा सकेगी।
डा0 पटैरिया के उद्बोधन का पॉडकॉस्ट भी यहाँ उपलब्ध कराया जा रहा है, जो अविकल रूप में प्रस्तुत है।
डॉ॰ मनोज पटैरिया का वक्तव्य
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10 प्रतिक्रियाएँ:
nice
अच्छी रिपोर्टिंग ! आप लोगों की मेहनत दिखने लगी है !
वाह जी बहुत बढ़िया. आपका श्रम श्लाघा योग्य है.
डॉ॰ मनोज पटैरिया का वक्तव्य सुना
अच्छा लगा आज विज्ञान ब्लोगिंग को नई उर्जा मिली
आभार
thanks for .........
विज्ञान संचार की जय हो।
शानदार रिपोर्टिंग...अच्छा प्रयास...बधाई.
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'शब्द सृजन की ओर' में 'साहित्य की अनुपम दीप शिखा : अमृता प्रीतम" (आज जन्म-तिथि पर)
bhaarat desh ke lie vigyaan kaa prasaar aur vaigyaanik samvaad aur bhi zaroori hai jahaan ab saakshartaa hi sahi dheere dheere badhne lgi hai .
hambhi is yagya me mubtilaa hain .shaamil hain .
shukriyaa !
veerubhai .
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