
आये दिन हम अन्तरिक्ष में होने वाले अनेक परीक्षणों के बारे में जानते रहते है पर कभी कभी हमारे दिमाग में एक सवाल उठने लगता है की आकाश में ये जो तारे हैं इनका निर्माण कैसे हुआ होगा ये अन्तरिक्ष की जानकारी भी बहुत रोचक है और इस अन्तरिक्ष को सही से जाननेके लिए हज़ारो वर्ष भी कम है।
आओ जानते है तारो के निर्माण पर किये गए इस अध्यन के बारे में - नवनिर्मित आकाश गंगा में अरबों साल पहले किसी विध्वंसक घटना की वजह से तारों के निर्माण की प्रक्रिया रूक गई थी।ब्रिटेन में डरहम विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने एक नए शोध में इस घटना के सबूत मिलने के बाद विश्वास व्यक्त किया है कि इससे मालूम हो सकता है कि हमारी आकाश गंगा के समान अन्य विशाल मंदाकिनियों का उनके निर्माण के बाद विस्तार क्यों नहीं होता रहा।वैज्ञानिकों ने आशा व्यक्त की है कि इस निष्कर्ष से आकाश गंगाओं के निर्माण और विकास के बारे में समझ और बढ़ सकती है।
गैस से हुआ नए तारों का निर्माण
वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन अरब साल पहले "एसएमएम जे1237 प्लस 6203" नामक इस विशाल आकाश गंगा का निर्माण महाविस्फोट के बाद हुआ। उस समय ब्रह्माण्ड की उम्र मौजूदा उम्र की एक चौथाई थी। निष्कर्षो के अनुसार इस आकाश गंगा में कई विस्फोट हुए, जो किसी परमाणु बम से होने वाले विस्फोट से खरबों गुना ज्यादा शक्तिशाली थे। इस तरह के विस्फोट लाखों साल तक हर सेकेण्ड होते रहे, जिनसे निकली गैस से नए तारों का निर्माण हुआ।
कहा जाता है सुपरनोवाइस गैस के कारण ये तारे आकाश गंगा की गुरूत्व शक्ति से बाहर हो गए, जिससे प्रभावी रूप से इनका विकास नियंत्रित हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि आकाश गंगा के ब्लैक होल से उत्पन्न मलबे से बाहर निकले प्रवाह या समाप्त हो रहे तारों से उत्पन्न शक्तिशाली हवाओं से भारी मात्रा में ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जिसे "सुपरनोवा" कहा जाता है। रॉयल सोसाइटी और रॉयल एस्ट्रोनोमिकल की आर्थिक सहायता से किया गया यह शोध रॉयल एस्ट्रोनोमिकल सोसाइटी के मासिक सूचना पत्र में प्रकाशित हुआ है।
उर्सा मेजर तारामंडल के मार्ग निर्देशन में जेमिनी वैधशाला का इस्तेमाल करते हुए इस आकाश गंगा का निरीक्षण किया गया। विकासशोध दल के प्रमुख डॉ0 डेव अलेक्जेंडर का कहना है, अतीत में देखने पर हमें एक विध्वंसक घटना का पता लगा है, जिसने तारों का निर्माण और स्थानीय ब्रह्माण्ड में एक विशाल आकाश गंगा का विकास रोक दिया। यह आकाश गंगा नए तारों को बनने से रोककर अपने विकास को नियंत्रित कर रही है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस घटना के पीछे ऊर्जा का भारी उत्सर्जन है, लेकिन इसका पता उन्हें अब लग पाया है।उनका कहना है, इसी तरह के भारी ऊर्जा उत्सर्जन ने तारों के निर्माण के लिए जरूरी पदार्थो को उड़ाकर संभवत: प्रारंभिक ब्रह्मांड में अन्य आकाश गंगाओं के विकास को रोक दिया। शोध दल अब यह पता लगाने के लिए तारों का निर्माण करने वाली अन्य विशाल आकाश गंगाओं का अध्ययन करने की योजना बना रहा है कि अन्य आकाश गंगाओं में भी इसी तरह की घटना तो नहीं हुई है।
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10 प्रतिक्रियाएँ:
Rochak Jaankari.
nice
# (वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन अरब साल पहले "एसएमएम जे1237 प्लस 6203" नामक इस विशाल आकाश गंगा का निर्माण महाविस्फोट के बाद हुआ। उस समय ब्रह्माण्ड की उम्र मौजूदा उम्र की एक चौथाई थी।).
कृपया अपनी जानकारी को दुरुस्त कर लें. ब्रह्माण्ड की सर्वमान्य वैज्ञानिक उम्र लगभग 13.6 अरब वर्ष है. इस हिसाब से उपर्युक्त तथ्य गलत सिद्ध हो जाता है.
# (निष्कर्षो के अनुसार इस आकाश गंगा में कई विस्फोट हुए, जो किसी परमाणु बम से होने वाले विस्फोट से खरबों गुना ज्यादा शक्तिशाली थे। इस तरह के विस्फोट लाखों साल तक हर सेकेण्ड होते रहे, जिनसे निकली गैस से नए तारों का निर्माण हुआ।).
आकाशगंगा में ऊपर बताये गए विस्फोट किस पिंड/पदार्थ में हुए? कैसे हुए? कृपया स्पष्ट करें.
उपयोगी जानकारी!
रोचक जानकारी बाँटते रहिए
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ब्लैक होल हरे होते हैं
निशान्त मिश्र जी---महाविष्फ़ोट किस पदार्थ में हुआ व आकाश्गन्गा में भी किस पदार्थ में हुआ , यह तो विग्यान आज तक नहीं बता पाया , न बता पायेगा। इसके लिये ’भारतीय वैदिक विग्यान ’ की ओर मुख करना पडेगा । वह अव्यक्त ब्रह्म की इच्छा ’ एकोsहं बहुष्याम’ थी , ’ओम’ रूप में जिससे व्यक्त ब्रह्म व उससे उत्पन्न आदि( condenced) ऊर्ज़ा से उत्पन्न द्वन्द्व ही विष्फ़ोट थे.
----अन्ग्रेज़ी वैग्यानिक लिटेरचर से हिन्दी करने में कुछ अस्पष्टता तो रह ही जाती है।
----तारों की निर्माण प्रक्रिया क्यों रुक गई, वह विध्वन्सक घटना की वज़ह से नहीं , अपितु---
--१.विग्यान के अनुसार..बिग्बेन्ग के ३ मिनट पश्चात हाइड्रोज़न व हीलियम के बनने पर- अत्यधिक शीतलता होने पर कोई एलेक्ट्रोन नहीं बचे थे अत: निर्माण व विकास युगों तक बन्द रहा, पुन: ताप बढने पर --प्रक्रिया चालू हुई ।
----वेदिक विग्यान के अनुसार ---ब्रह्मा को पूर्व- निर्माण प्रक्रिया याद नहीं आरही थी अत: निर्माण रुका रहा, युगॊ तक ब्रह्मा ने ब्रह्म व मां सरस्वती की आराधना की तब उसे भूली हुई विध्या याद आई व निर्माण प्रारम्भ हुआ।
@ डॉ. श्याम गुप्ता जी,
सर आपने स्पष्टीकरण देने का प्रयास किया इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ परन्तु शुद्ध विज्ञान पर आधारित विषय में वैदिक अथवा प्राच्य तथ्यों का उल्लेख करना यहाँ उचित नहीं जान पड़ रहा है.
-शुद्ध विग्यान कुछ नहीं होता, विग्यान -विग्यान होता है, हर कण,क्रिया, घटना, तत्व में, यही तो दुनिया को समझाने का प्रयत्न है कि वेदिक -ग्यान , वस्तुतः विग्यान ही है, कथ्य सांकेतिक हैं, जैसे आप आस्त्रेलिया के लिये ’ कन्गारू’ व भारत के लिये ’ बाघ’ लिखते हैं ।
---इतिहास को जाने बिना आगे प्रगति के द्वार कैसे खुलेंगे, विग्यान,- साहित्य. कला आदि से अलग नहीं है क्योंकि दोनों ही मानव व मानव-समाज की प्रगति से सम्बद्ध हैं ।
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