यह पानी है या ज़हर जो हम ख़रीद कर पी रहें है: सलीम ख़ान

प्रस्तुतकर्ता: "सलीम ख़ान"
भारत में अब यह आम फैशन हो चला है कि हर आदमी नल के पानी को छोड़कर बोतल का पानी पीना चाहता है वजह यह है कि वह 'मिनरल वॉटर' होता है और 'शुद्ध' भी होता है.बात कुछ ठीक भी लगती है क्योंकि पानी की बोतल ख़रीदने वाले हर व्यक्ति के मन में कहीं ये विश्वास ज़रूर होता है कि वह ऐसा पानी पी रहा है जो उसकी सेहत के लिए बहुत लाभदायक है.
या इसे कुछ इस तरह भी कह सकते हैं कि पानी की बोतलें बनाने वाली कंपनियों ने एक सुनियोजित प्रचार के ज़रिए लोगों के दिलों में ये बात बिठा दी है कि पैसे से ख़रीदकर पिया गया पानी ही सेहत के लिए ठीक है और आम नल का पानी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक़ है.
लेकिन क्या हो जब आपको ये पता चले कि जो पानी की बोतल आप दूध के भाव ख़रीदते हैं उस बोतल में शुद्ध जल के बजाय ऐसा पानी होता है जो सेहत के लिए किसी ज़हर से कम नहीं. आपका भरोसा हिल सकता है और यह स्वभाविक भी है क्योंकि उसकी ठोस वजह है.


मिनरल वॉटर और शुद्ध पेय जल के नाम पर बेची जाने वाली बोतलों में कीटनाशक पाए गए हैं. और सब जानते हैं कि कीटनाशक सेहत के लिए ज़हर के बराबर हैं
डॉ सुनीता नारायण
वजह ये है कि आमतौर पर हर दुकान, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों बिकने वाली पानी की बोतलों की जाँच में पाया गया है कि उनमें ख़तरनाक़ हद तक कीटनाशक रसायन तक मिले होती हैं.


कीटनाशक
ये नमूने न केवल बाज़ार से बल्कि उन फ़ैक्टरियों से भी लिए गए जहाँ पानी की बोतलें भरी जाती हैं. पानी की इन बोतलों की जाँच प्रयोगशाला में अमरीकी तकनीक और अत्याधुनिक पद्धति और उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए की गई. विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के एक अन्य वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर एच बी माथुर बताते हैं कि नमूनों की कई बार और प्रामाणिक तरीक़े से जाँच की गई.

निदेशक सुनीता नारायण कहती हैं, "जाँच के बाद जो जानकारी सामने आई वो बहुत अच्छी नहीं है."

भारत के विज्ञान और पर्यावरण केंद्र यानि सीएसई ने अनेक ब्राँडों वाली पानी की बोतलों की जाँच की. केंद्र की निदेशक सुनीता नारायण बताती हैं कि सहयोगियों में ही यह विचार सामने आया कि बाज़ार में बिकने वाली खाने की चीज़ों और पानी की बोतलों की क्यों न जाँच की जाए कि इनका स्तर क्या होता है.इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बाज़ार में बिक रहे बोतलबंद पानी के कई नमूने जमा किए गए.


अधिकतर बोतलों में ख़तरनाक़ हद तक कीटनाशक मिले
"मिनरल वॉटर और शुद्ध पेय जल के नाम पर बेची जाने वाली बोतलों में कीटनाशक पाए गए हैं. और सब जानते हैं कि कीटनाशक सेहत के लिए ज़हर के बराबर हैं."

डॉक्टर सपना के अनुसार "क्लोर पायरीफ़ोस नामक कीटनाशक से कैंसर बहुत व्यापक पैमाने पर होता देखा गया है." "यह बहुत चिंता की बात है कि पानी की बोतलों में कैंसर की बीमारी पैदा करने वाले रसायन मिले."

ये वैज्ञानिक बताते हैं कि मुम्बई के नमूनों के हालात कुछ बेहतर थे लेकिन दिल्ली के नमूनों में तो कीटनाशक रसायनों की मात्रा सामान्य से सौ प्रतिशत तक ज़्यादा पाई गई.

सलाह
डॉक्टर सुनीता नारायण बताती हैं कि बोतलों में पानी बेचने वाली ज़्यादातर कंपनियाँ भूमि तल से या तालाब से लिया गया पानी ही भरती हैं.

" ये जल स्रोत ऐसी जगह हैं जहाँ खेतों में इस्तेमाल के लिए कीटनाशक इस्तेमाल किए जाते हैं जिनका असर पानी में भी रहता है."

डॉक्टर सुनीता कहती हैं कि चिंता की बात ये है कि ग़रीब आदमी भी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा ख़र्च करके ये पानी ख़रीदता है और उसे मिलता क्या है - कैंसर का ख़तरा.

"यहाँ सवाल ये भी उठता है कि सरकार इस बारे में क्या कर रही है?"

डॉक्टर सुनीता कहती हैं "जब तक आम आदमी की सेहत के बारे में बनाए गए नियम क़ानून और मानक लागू नहीं किए जाते, तब तक कुछ नहीं हो सकता."

डॉक्टर सुनीता बताती हैं कि चौंकाने वाली बात ये है कि कीटनाशक सभी बोतलों में मिला सिवाय एक कंपनी की बोतल के.

"और हर बोतल में कीटनाशकों की मात्रा सामान्य से काफ़ी ऊपर मिली."

सपना जॉन्सन बताती हैं कि 34 नमूनों की जाँच में लगभग सभी बोतलों में मुख्य रूप से लिंडेन और क्लोर पायरीफ़ोस नामक कीटनाशक पाए गए. 

"मुद्दा ये भी है कि पानी की बोतलें बनाने वाली कंपनियों के स्थान पर आम आदमी की सेहत का ज़्यादा ध्यान रखा जाना चाहिए."


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11 प्रतिक्रियाएँ:

ramesh sant said...

yah sach hai ki aaj aadhunikta ki aor hai

डॉ. मनोज मिश्र said...

क्या किया जाय,पानी पियें तो रोयें न पीयें तो रोये..

निर्मला कपिला said...

ांअँखें खोल देने वाली पोस्ट है। धन्यवाद इस जानकारी के लिये।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सशक्त अभिव्यक्ति!

नारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!

Mithilesh dubey said...

सलीम भाई गजब की जानकारी लाएं है आप , आभार आपका ।

Ashish (Ashu) said...

भाई बुरा मत मानियेगा मुझे कुछ गलत लग रहा हॆ
आपने कहा "डॉक्टर सुनीता बताती हैं कि चौंकाने वाली बात ये है कि कीटनाशक सभी बोतलों में मिला सिवाय एक कंपनी की बोतल के" तो प्लीज सुनीता जी से कहिये कि किस कंपनी की पानी मे कीटनाशक नही मिले ..ऎसे मे तो सभी कहेंगे कि मेरे पानी मे कीटनाशक नही मिला...तब तो कुछ समझ मे आये..वॆसे भी अब भी कीटनाशक पचाने की आदत नही डालोगे तो कल्याण ही हॆ..हर तरफ तो कीटनाशक प्रयोग हो रहा हॆ...पानी नही पियोगे..चलो कोई बात नही पर सब्जी तो खानी ही पडेगी..इसे भी नही खाओगे वाह भाई वाह..पर दाल चावल तो खाओगे इसे भी नही..वाह पर रोटी तो खाओगे..हे हे तब बतायिये बाजार मे जो आटा मिलता हॆ वो कितने साफ सफाई से पीसा जाता हॆ देखने के बाद तो शायद ही निवाला अन्दर लीजियेगा..आप कहियेगा हम आटा नही गेंहू खरीदते हॆ भाई वहा भी तो कीट्नाशक का प्रयोग हुआ हॆ ...

दिलीप कवठेकर said...

आशु जी का कहना गलत नहीं , मगर उचित क्या है यह बहस हो सकती है. पूरे कुंएं में भांग पडी़ है.

Dr. shyam gupta said...

----आसु जी ने बहुत ही सटीक बात कही है, कीट नाशक तो प्रत्येक बस्तु में पाये जारहे हैं, यह क्यों नहीं बताया गया कि क्या कार्यवाही हुई, जिस कम्पनी के पानी में कीट्नाशक नहीं उसने कहां से पानी लिया था, क्या सभी को बहीं से पानी लेने को कहा गया, जब अन्डर वाटर टेबल या सप्लाई का पानी ही एसा है तो मिनरल वाटर कम्पनी क्या करे, उपभोक्ता क्या करे । कीटनाशक के प्रयोग को कोसना चाहिये न कि ्पानी की बोतल को । गरीब तो अभी भी नगरपालिका व कुए का पानी पीते हैं।
----गेहूं सब्ज़ियों में न जाने कब से कीट्नाशक मिल रहे है, मिनरल वाटर आने से पहले ही, किसी ने अभी तक क्या किया.

सलीम ख़ान said...

bahas se behtar samajh hona chhiye........

अल्पना वर्मा said...

chaunka dene wali jaankari hai.

article achcha likha hai.
aur matter ki prastuti bhi achchee hai.

Ankit.....................the real scholar said...

कुछ लोग भ्रमित हो रहे हैं
माना की कीट नाशक भूगर्भ जल में ही हैं परन्तु इन पानी की बोतलों को बनाने वाली फक्ट्रियूं से भी बहुत सा रसायन निकलता है जो जल को प्रदूषित करता है जिससे पानी और भी अशुद्ध हो जाता है | इसलिए अगर हम बोतल बंद पानी ना पियें तो शायद कुछ समय बाद हमे कुछ शुद्ध पानी मिलेगा ....आखिर जल की अशुद्धि के ली हमारी बोतल बंद पानी पीने की आदत भी कुछ हद तक जिम्मेदार है

और ये बोतलों का पानी कैसा होता है इ तो आपको पता ही चल गया

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