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23 प्रतिक्रियाएँ:
Bloging ki sthapna men ye ek mahatvapoorn kadam hai, Jiske liye Dr. Arvind Mishra ji badhayi ke patra hain.
निश्चित रूप से यह लेख आने वाले समय मे वैज्ञानिक दुनिया और उसमे बलाग के स्थान की रूपरेखा खीचता है , डा0 अरविंद मिश्र जी के इस मील का पत्थर सिद्ध होने वाले लेख के लिये धन्यवाद साथ ही Science Reporter पर इसके प्रकाशन पर उन्हे बधाइ । जिन्हे ब्लाग नामक चिडिया के बारे मे कुछ भी जानकारी नही है उन्हे तो ये लेख अवश्य पढना चाहिये
अंत मे ... एक दो जगह जो शक है वो
1- साइंस जर्नलिज्म को साइंस ब्लागिंग रिप्लेस कर सकता है
2-साइंस ब्लागिंग मे पोस्टो की आवृति (प्रतिदिन) शायद गम्भीरता को बहुत कम कर देगा और उन्नत विचारो की जगह रेस हो सकती है
यह अत्यंत हर्ष का विषय है , अरविन्द जी बधाई के पात्र हैं , अरविन्द जी बहुत बहुत बधाई
भविष्य उज्ज्वल है
बहुत अच्छा लगा यह पढ़ कर ,विज्ञान ब्लोगिंग का भविष्य वाकई उज्जवल है
साइंस ब्लॉगिंग की सम्पूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत करता विस्तृत आलेख ! लगभग सभी पहलूओं को छूने की बेहतरीन कोशिश है इस आलेख में । नये ब्लॉगर्स के लिये भी अत्यन्त महत्वपूर्ण ।
प्रस्तुति का आभार ।
ब्लॉगिंग की ताकत से तो इंकार नहीं किया जा सकता .. अच्छा आलेख है डॉ अरविंद मिश्राजी का .. आनेवाले दिनों में ब्लॉग समाज के लिए फायदेमंद हो .. हम ईश्वर से यही प्रार्थना करेंगे !!
ज़ाकिर भाई, मैंने इसे पढ़ा है बहुत ही सशक्त आलेख है यह!!! अरविन्द जी को बधाइयां!!!
स्वच्छ सन्देश: विज्ञान की आवाज़
(svachchhsandesh.blogspot.com)
अरविंद जी को बहुत बहुत बधाइयाँ!
nice
मैंने भी कल ही "साइंस रिपोर्टर" का जनवरी अंक लिया और पढ़ भी लिया,बेहतरीन आलेख है.
मैंने कल ही बधाई भी दे दिया.
निःसंदेह यह मौलिक कार्य है,बधाइयाँ तो मिलनी ही चाहिए.
पिछले दो दिनों से सन्नाटा सा था मिसिर जी की जानिब और हम सोच ही रहे थे कि ख़ामोशी ब्रह्मकुमार का स्वभाव तो है नहीं ! ये लो धमाका कर दिया !
साधु...साधु...साधु !
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मेरे आफिस में दो दिन पहले ही आगयी थी साइंस रिपोर्टर .
बहुत ही शानदार और जानकारी भरा लेख है,
खुशी हुई कि अरविन्द सर फिर से पहले जैसा पत्र-पत्रिकाओं में लिखने लगे है .
मुख्य-धारा में पुनः वापस आने के लिए उन्हें और इसकी सूचना आप द्वारा ब्लाग पर देने के लिए -बहुत -बहुत बधाई.
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सत्येन्द्र जी, आने वाले समय में निश्चित ही डिजिटल दुनिया एक बड़ी चुनौती बनेगी पारंपरिक संहार माध्यमों के लिए और हाँ मुझे नहीं लगता की यहाँ गंभीर चिंतन के लिए भी कोई खतरा है -मनुष्य ने हमेशा खुद को नए चुनौतियों के प्रति अनुकूलित किया है ,
अली साहब आप ब्रह्मकुमारी समाज से तो मुझे नहीं जोड़ रहे हैं ? चिर कुमार कहना चाहिए था -"अहई कुमार मोर लघुभ्राता ' राम ने कहा था लक्ष्मण के बारे में सूर्पनखा से !
तनु ,आपने बुलाया हम चले आये रे (मुख्य धारा में ) .....आगे भी देखिएगा ....
@मिश्रा जी
शब्द संक्षिप्त करने की बुरी आदत है वर्ना क्या मजाल जो आपको ब्रह्म कुमारियों से जोड़ दूं ! निवेदन ये है कि 'ब्रह्म कुमार' को केवल 'ब्राह्मण कुमार' के आशय के साथ पढ़ा जाए !
वैसे आपने जो विकल्प सुझाया है उस पर भी मनन किया जा रहा है ! एक नग सूर्पनखा भी ध्यान में है इतना तो जान ही लीजिये !
अरविंद जी को बहुत-बहुत बधाई...
जय हिंद...
आलेख पढ़ा..कई अच्छे ब्लॉगs के लिंक भी मिले.
बहुत ही अच्छा प्रभावी लेख लिखा है.
डॉक्टर अरविंद जी को बधाई.
ब्लॉग्गिंग में विज्ञान विषयों के लेखों का भविष्य उज्ज्वल है,इसमें दो राय नहीं.
@Arvind Mishra "आने वाले समय में निश्चित ही डिजिटल दुनिया एक बड़ी चुनौती बनेगी पारंपरिक संचार माध्यमों के लिए"
आमीन .....
अरविन्दजी को बधाई !!
अभी ८०% जनता को कम्प्यूटर चलाना, अन्ग्रेज़ी/ हिन्दी पढना नहीं आता , विग्यान रेपोर्टेर/ ब्लोग्गिन्ग का क्या सशक्त - अशक्त होने का अर्थ ?
आदरणीय अरविंद जी को उनके शानदार प्रयासों के लिए कोटिशः बधाइयाँ..!
Ye toh Bhaut hi khushi ki baat hai jaroor hi aane wale samay me Science blogging ka apna alag hi mahtav hoga
Science Bloggers parivaar ko bhaut bhaut Badhai
सहमत हैं जी।
लोहिड़ी पर्व और मकर संक्रांति की
हार्दिक शुभकामनाएँ!
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