वो आसमान से मौत बनके बरसेगी। -सलीम खान

लोककथाओं में ही नहीं अनेक किवदंतियों में भी आसमान से ईश्वर का क़हर बरसने के किस्से प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। हालाँकि इन कथाओं को हमेशा शक की निगाह से देखा जाता रहा है, लेकिन आज के घोर वैज्ञानिक युग में भी कुछ ऐसे हालात बन रहे हैं, कि लोक कथाओं के वह किस्से हमें सच होने जैसे लग रहे हैं। बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण के कारण हमारे वायुमण्डल में 'अम्ल वर्षा' की संभावनाएं प्रबल होती जा रही हैं। यह अम्ल वर्षा किन्हीं मामलों में ईश्वरीय कहर से कम नहीं। यह क्या है और इसके पीछे क्या कारण हैं, बता रहे हैं सलीम खान

'अम्ल वर्षा' को अंग्रेज़ी में 'acid rain' कहते हैं. जैसा कि नाम से ही लग रहा है कि यह किसी प्रकार की वर्षा है जो अम्लीय होगी. गाड़ी, औद्योगिक उत्पादन आदि के प्रक्रिया के उपरान्त निकली ज़हरीली गैसें (सल्फर-डाई- ओक्साईड और नाइत्रोज़न ओक्साईड) जो कि ऊपर बारिश के पानी से मिल कर अम्लीय अवस्था में आ जाती हैं. वह वर्षा जिसके पानी में यह गैस मिल जाती है अम्ल वर्षा कहलाती है.

SO2 + H2O = H2SO4 Sulfuric Acid
NOx + H2O = HNOx Nitric Acid

अम्ल वर्षा हमारे लिए पर्यावरण सम्बन्धी मौजूदा समस्याओं में से एक सबसे बड़ी समस्या है. यह अदृश्य गैसों से निर्मित होती है जो कि  आम तौर पर ऑटोमोबाइल या कोयला या जल विद्धुत संयंत्रों के कारण वातावरण में बनतीं है. यह अत्यंत विनाशकारी होती है.

निम्न चित्र के माध्यम से हम अम्ल वर्षा को समझ सकते हैं.


वैज्ञानिकों ने इसके बारे में सबसे पहले सन 1852 में जाना. एक अँगरेज़ वैज्ञानिक रॉबर्ट एग्नस (Robert Agnus) ने अम्ल वर्षा के बारे सबसे पहले इसे परिभाषित किया और इसके कारण और विशेषताओं की व्याख्या की. तब से अब तक, अम्ल वर्षा के वैज्ञानिकों और वैश्विक नीति-निर्माताओं के बीच तीव्र बहस का एक मुद्दा रहा है.

अम्ल वर्षा अति-प्रदूषित इलाक़े में बड़ी दूर तक बड़ी आसानी से फैलती है. यही वजह है कि यह एक वैश्विक प्रदूषण समस्या है. जिसके लिए विभिन्न देश एक दुसरे पर तोहमत लगाते हैं. जबकि कोई भी इसके प्रति उतना गंभीर नहीं है जितनी तेज़ी से यह समस्या बढ़ रही है. पिछले कुछ सालों में विज्ञान ने अम्ल वर्षा के मूलभूत कारणों को जानने की कोशिश कि तो कुछ वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि मानवीय उत्पादन मुख्य रूप से जिम्मेदार है तो वही कुछ वैज्ञानिकों ने इस समस्या का ज़िम्मेदार प्राकृतिक कारणों को माना. वस्तुतः सभी देशों को अम्ल वर्षा के कारणों और उसके दुष्प्रभावों के प्रति सजग रहना होगा.
-सलीम ख़ान

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23 प्रतिक्रियाएँ:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अम्ल वर्षा के बारे में रोचक जानकारी है। सलीम भाई, ऐसे ही लिखते रहें, हमें आपसे बहुत उम्मीदें हैं।
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लखनऊ बना मंसूरी, क्या हैं दो पैग जरूरी?
2009 के ब्लागर्स सम्मान हेतु ऑनलाइन नामांकन चालू है।

रावेंद्रकुमार रवि said...

नए वर्ष में जागो भाई, हर्ष सदा बरसाने को!

नया वर्ष हो सबको शुभ!

जाओ बीते वर्ष

नए वर्ष की नई सुबह में

महके हृदय तुम्हारा!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत रोचक लगी यह जानकारी शुक्रिया

Arshia said...

Jaankariparak Aalekh, Aabhar.

Satyendra Kumar said...

पता नही वेदो मे अम्ल वर्षा का कुछ वर्णन है कि नही .......... आजकल वैदिक ज्ञान वाले नही दिख रहे है ......अगर वर्णन होगा तो उपाय भी होगा

Ankit.....................the real scholar said...

अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं महत्त्वपूर्ण लेख है यह ,हमे वास्तव में इसकी आवश्यकता थी ..और आगे भी रहेगी


@ सत्येन्द्र जी
जी सत्येन्द्र जी , वर्णन का तो नहीं पता पर उपाय अवश्य ही है वेदों में और वेदों में ही नहीं लगभग पत्येक धार्मिक ग्रन्थ में है वर्णन उपाय का
और उपाय है 'सदा जीवन तथा संयमित जीवन शैली' |आप उन गैसों का उत्पादन कम कीजिये जो की अम्ल वेर्षा के लिए उत्तरदाई हैं कुछ कमी करनी होगी अपनी सुविधाओं में और कुछ परिवर्तन करना होगा जीवन शैली में बस हो गया उपाय और अगर आपको वेड या वैदिक ज्ञान पसंद नहीं तो कोपेनहेगन की तहफ देख कर परिवर्तन कर लीजिये|

Mithilesh dubey said...

बहुत बढ़िया व उपयोगी जानकारी दी है।आभार।

Arvind Mishra said...

हमने सोचा था कि बरसात में बरसेगी शराब उफ़ आगे से सावधान रहना होगा -सलीम भाई आपके ऐसे लेखन पर मैं कुर्बान जाता हूँ !
और हाँ सत्येन्द्र ने तो आपसे पूंछा नही था .......आपने ही वैदिक ज्ञान का ठेका अकेले थोड़े ही ले रखा है ..
हा हा ...वे भी आते होगें जिन्हें सत्येन्द्र जी ने इतनी शिद्दत से याद किया है ---मैंने पुकारा और वे हाले आये रे की स्टाईल में !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत बढ़िया व उपयोगी जानकारी!

इस नये वर्ष में आप हर्षित रहें,
ख्याति-यश में सदा आप चर्चित रहें।
मन के उपवन में महकें सुगन्धित सुमन,
राष्ट्र के यज्ञ में आप अर्पित रहें।।

Ankit.....................the real scholar said...

@ सत्येन्द्र जी अरविन्द जी
वैसे यह प्रश्न था या व्यंग

हमने तो दोनों का उत्तर दे दिया और आप अम्ल वर्षा से ज्यादा रूचि वेदी की निंदा या उपहास में ले रहे हैं ये तो शायद कुछ कम ठीक है|
आप का क्या मानना है ?अम्ल वर्ष से बचने के लिए कोई उपाय है क्या आपके आधुनिक प्रगतिशील विज्ञानं में?है तो बताइए जल्दी से| वो क्या है ना की हमे अम्ल वेर्षा से बहुत डर लगता है और आप जैसे विज्ञानियों के पास आकार तो मेरा अज्ञान दूर होना ही चाहिए|

RAJ SINH said...

प्यारे सलीम ,
मन से कह रहा हूँ . 'स्वक्छ सन्देश ' !

हिमांशु । Himanshu said...

अम्ल वर्षा सम्बंधित बेहतर जानकारी ! आभार ।

Dr. shyam gupta said...

बच्चा अन्कित तो बहुत ही सटीक जा रहा है भार्तीय ग्यान -विग्यान का झन्डा उठाये, बडे बडों के....। अन्कित की सारी बात सत्य है, यही तो सही सार्थक वैग्यानिक सोच व बोध है कि किसी भी विचार, तथ्य व बस्तु के बारे में पूरी जानकारी के बाद ही कोई मन्तव्य बनाय जाय नकि पूर्वाग्रह व सिर्फ़ सुन कर।
-----पर्यावरण के बारे मेण रिक, सम, यजु व अथर्व वेद से दो मन्त्र हैं-
""इमं भ्रूर्णायु बरुणस्य नाभिं त्वचम पशूनां द्विपदां चतुष्पदां। त्वष्टुंः प्रज़ानाम प्रथमं जनित्रमाने मां हिन्सींः परमे व्योमन ॥""(यज. १३/५० ) अर्थात यह ( प्रथ्वी के चारों ओर ) रक्षक आवरण्जो स्रष्टि में सर्वप्रथम उत्पन्न वरुण की नाभि ( उत्पत्ति स्थल--जल )रूप तथा त्वचा की तरह रहकर, छन्ने की तरह अन्तरिक्ष कणों को प्रविष्ठ न होने देकर प्राणियों की रक्षा करता है , उसे ऊर्ज़ा के अति उपयोग से नष्ट न करें ।

Dr. shyam gupta said...

पुनश्च--इसका उपाय भी अथर्व. १०/५/१८ में बताया गया है --""अजः पक्वः स्वर्गलोके दधांति पन्चौदनो निश्रंति बाधयामः ।"" अर्थात यह पन्चौदन अजः (यग्य मे समर्पित सामग्री-अन्न,विचार, कर्म रूपी )परिपक्व होकर स्वर्ग ( अन्तरिक्ष, द्यौ, ईथर )में स्थापित होता है तथा पाप देवता [ प्रदूषण, विक्रति, रासायनिक विक्रतियों से उत्पन्न प्री-एटोमिक, सब-एटोमिक, परमाणु,अणु व पदार्थ (यथा एसिड वर्षा आदि)]को दूर हटाता है।

Dr. shyam gupta said...

--प्रथम मन्त्र में प्रथ्वी की रक्षक ओज़ोन लेयर, व आयनो स्फ़ीयर का वर्णन है,दूसरे में उसे व प्रदूषण आदि को ठीक रखने के उपाय. । पर्यावरण के बारे में बहुत कुछ वर्णन है वेदिक साहित्य में कभी अपने ब्लोग या अन्य ई- पत्रिका में आलेख लिखूंगा। वस्तुतः कथन यह है कि--"" जो कुछ भी विश्व में है वह वेदों में है, जो वेदों में नहीं वह कहीं नहीं है ।""

Dr. shyam gupta said...

जानकारी तो अच्छी है,पर लगभग २०० साल पुरानी--१८५२ की । वैसे मूलतः सफ़्फ़्यूरिक अम्ल ही बनता है , नाइट्रोजेन तो प्रथ्वी पर खाद बनने का नाइट्रोजन चक्र के अन्तर्गत है ।

Khursheed said...

विज्ञान के बारे में वेदों में ही नहीं कुरआन में भी बहुत कुछ लिखा है!

विज्ञान ने कुरआन के तथ्यों को लगभग 80% सत्य सिद्ध कर दिया है और बाक़ी 20% को इसलिए सिद्ध नहीं कर पाया है क्यूंकि विज्ञान अभी इतना विकसित नहीं हो पाया है कि वह कुरआन के सभी तथ्यों को समझ सके. जब विज्ञान और तरक्क़ी कर लेगा तो हो सकता है कि बाक़ी बचे 20% को भी सिद्ध कर ले जाये.

zeashan zaidi said...

काफी चौंकाने वाली जानकारी दी है श्याम जी आपने. मेरे विचार से इस श्लोक के दूसरे भाग का भी कोई गूढ़ अर्थ होगा जिसका ऊपरी अर्थ तो ये है, "आपको जंगली ऊंटों की ओर निर्देशित किया जाता है उनके साथ विस्तार पाकर आप सुख मानें. जिनसे हम द्वेष रखते हैं, ऐसे ऊँट इत्यादि पशुओं पर आपका कोप प्रकट हो."

Dr. shyam gupta said...

आपतो सिर्फ़ खुर्सीद भाई के सरल से कथन पर ध्यान दें ज़ीशान जी,कहां एसी गहन, समझ से परे बातों व ऊंटों के जन्गलों के चक्कर में पडॆ हैं ।

zeashan zaidi said...

श्याम जी, इन श्लोकों को मैंने काफी गंभीरता से देखा है. विशेषरूप से इसके बाद वाला (यज. १३/५१), 'यह अज (बकरा) परमेश्वर की तेजस्विता से संपन्न हुआ है. उसी से यह जीव विश्व के रचयिता का सक्षात्कार करने में संपन्न हुआ है. उसी के द्वारा देवता श्रेष्ट देवता के परम पद को प्राप्त करते है.'
कुरआन में पैग़म्बर हज़रत इब्राहीम जब अपने बेटे को कुर्बानी के लिए ले गए तो वहाँ एक बकरा कुर्बान हुआ था जो अल्लाह की तरफ से आया था. इस कुर्बानी के बाद ही हज़रत इब्राहीम को सर्वश्रेष्ठ 'इमाम' की उपाधि अल्लाह ने प्रदान की थी. इसी की याद में मुसलमान बकरीद मनाते है. उपरोक्त श्लोक इस घटना से काफी मिलता है. ये कुर्बानी कुरान के साथ बाइबिल में भी मौजूद है.

अल्पना वर्मा said...

रोचक!

Dr. shyam gupta said...

""हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता, गावहिं वेद पुराण श्रुति सन्ता ""----मेरे विचार से श्रुति शब्द का अर्थ दुनिया के समास्त धर्म ग्रन्थों से है।

सलीम ख़ान said...

thanks to all for valuable suggestion and comments!

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