अदभुत है हमारा शरीर....



दुनिया में कितनी ही अजीब चीजें हैं किसी को कुछ अजीब और विलक्षण लगता है किसी को कुछ। सभी के अपने तर्क अपने विचार हैं पर सबसे अधिक विलक्षण यदि कुछ है तो विज्ञान की कसौटी पर तो वह है मानव शरीर। इस से अधिक अदभुत न तो कंप्युटर नजर आता न ही कोई अन्य मशीन... कैसे आइये जानते हैं इस अदभुत मानव शरीर के बारे में...

सांस लेना-- सांस लिए बिना हम एक पल भी जीवित नहीं रह सकते हैं ..पर हम जैसे जैसे बड़े होते जाते हैं वैसे वैसे हमारे सांस लेने की गति कम होती जाती है ..नवजात शिशु एक मिनट में ६० बार सांस लेता है | किशोर २० बार और युवा केवल सोलह बार |

हड्डियाँ-- जिन पर हमारा शरीर टिका है आकार लेता है ..उसके बारे में अदभुत बात यह जानने को मिली कि जन्म के समय शिशु के शरीर में ३०० हड्डियाँ होती है .व्यस्क हो जाने पर शरीर में केवल २०६ हड्डियाँ रह जाती है |

वेग-
- जब कोई मनुष्य छींकता है तो बाहर निकलने वाली हवा का वेग १६० किलोमीटर प्रति घंटा होता है मतलब एक्प्रेस गा़डी़ से भी अधिक स्पीड़।

मजबूत हड्डियाँ-- किसी भी दुर्घटना होने पर हड्डियाँ ही सबसे अधिक टूटती हैं, पर जबड़े की हड्डी बड़ी मजबूत होती है | वह लगभग २८० किलो वजन भी सहन कर सकती है |

विद्युत ..एक स्वस्थ युवा शरीर का मस्तिष्क २० वाट विद्युत पैदा कर सकता है| हमारे शरीर की मांसपेशियों का बल विधुत आवेग के आकर्षण एवं विकषर्ण से पैदा होता है | मस्तिष्क को प्राप्त होने वाले सभी सन्देश भी विद्युत धारा के रूप में ही तंत्रिकाओं को मिलते हैं या विद्युत सन्देश कुछ विशेष प्रकार की कोशिकाओं की विद्युत रासायनिक प्रकिर्याओं के फलस्वरूप पैदा होते हैं | यह विद्युत सन्देश बिमारियों के बारे में संकेत देते हैं | जैसे दिल के संकेतों की तेजी को नाप कर आसानी से जाना जा सकता है कि दिल कि धड़कने सही ढंग से काम कर रही है या नहीं | शरीर के भीतर के ये विद्युत सन्देश डाक्टरों के लिए बहुत महत्व का काम करते हैं | मेडिकल साइंस की भाषा में दिल से आने वाले संदशों को ईसीजी ,मांसपेशियों से आने वाले सन्देश को ईएमजी कहा जाता है |

आंसू-- जब एक नवजात शिशु रोता है तो उसके आंसू नहीं आते क्यों कि तब तक उसकी अश्रुग्रंथियाँ विकसित नहीं होती है |

स्नायु
-- हमें हँसाने के लिए १७ स्नायुं का प्रयोग करना पड़ता है जबकि रोने के लिए ४३ स्नायु काम में लेने पड़ते हैं | अब फिजूल खर्च तो रोने वाले काम में ही हुआ न इस लिए खूब हंसिये |

लोहा-- हमारे शरीर में लोहा भी होता है इतना कि एक शरीर से प्राप्त लोहे से एक इंच की कील भी तैयार की जा सकती है |

मस्तिष्क-- बहुत समान खर्च होता है इसको बनाने में | लगभग दस अरब तो स्नायुं कोशिकाएं होती है इस में | और वजन सिर्फ डेढ़ किलो |

फालतू का कचर-- शरीर में एपेंडिक्स .कशेरुका की बेकार हुई पूंछ कानों में कुलबुलाने वाली मांसपेशियां आदि किसी काम नहीं आते हैं |

हमारा शरीर के कई अंग बहुत शोर भी करते हैं सिर्फ चलने बोलने के अलावा | कुछ आवाजे दूसरे को भी सुनाई देती है कुछ सिर्फ खुद को इन्हें बाडी नाइसेस कहा जाता है| इसमें सबसे प्रमुख है खर्राटे| यह साँस के साथ आने वाली आवाज़ है जो हमेशा सोने पर आती है | मुंह खुला रहने से, हवा की वजह से गले की झिल्ली के कम्पन से या आवाज आती है और यह खुद को कभी नहीं सुनाई देती है |

खाना खाते समय जो अतिरिक्त हवा पेट में चली जाती है वह डकार बन कर वह आवाज करती है | कई लोग जम्हाई बड़ी आवाज़ के साथ लेते हैं | जब शरीर को पूरी आक्सीजन नहीं मिलती है तो जम्हाई ले कर शरीर में वह आक्सीजन की कमी पूरी की जाती है | हमारे पेट में हवा, पानी होते हैं जो गुड गुड आवाज करते रहते हैं इन्हें स्टोमेक ग्राउल कहा जाता है |

नाक की सफाई छींक के या शरीर खुद कर लेता है | हिचकी भी एक बाडी नाईस है | डायफाम में यानी मध्य पट में तनाव की वजह से हिचकी आती है या एक मसल होती है जो फेफडों की हवा को बाहर भीतर भेजती है जब किसी कारण यह प्रोसेस रुक जाता है तो भीतर की हवा बाहर आने के लिए धक्का देती है तो ठिक्क की आवाज आती है।

तो देखा आपने कितना अदभुत है यह शरीर हमारा और कितना शोर करता है सो सोचिये अधिक बोलिए कम ताकि कुछ तो ध्वनि प्रदूषण कम हो और स्वस्थ रहे खुश रहे ताकि आपका यह अदभुत शरीर ठीक से अपना काम करता रहे |

19 प्रतिक्रियाएँ:

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया जानकारी .. आपके विचारो से सहमत हूँ ....आभार

Arvind Mishra said...

वाह, खुद अपने बारे में जानना !

खुला सांड said...

सच कहा है इस शरीर के अन्दर कितनी बड़ी बड़ी फक्ट्रियाँ है !! अगर एक मनुस्श्य का दिमाग बनाया जाए तो कितने एल्क्ट्रिक और कितनी जगह लगेगी? बता सकते हैं ??

जी.के. अवधिया said...

मानव शरीर के विषय में अत्यन्त ज्ञानवर्धक लेख!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

रंजना जी, वाकई आपने बहुत सी ऐसी बातें बताईं, जो मुझे नहीं मालूम थीं। आभार।

Gadnayap Pandey said...

Chhoti-chhoti magar rpchak jaankariyaan.

वन्दना said...

gyanvardhak jankari...........aabhar

हिमांशु । Himanshu said...

बहुत ढंग से दी गयी जानकारी । आभार ।

Dr. Mahesh Sinha said...

वाकई ऐसी कोई चीज विज्ञानं नहीं बना पाया . कुछ विशेष ध्यान की परिस्तिथियों में आप अपने खर्राटे भी सुन सकते हैं.
हिचकी की आवाज बंद स्वास नाली के होते हुए diaphram के स्वास लेने के प्रयास से होती है .

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

रंजना जी !
कविता तो आपकी पढ़ी ही और
विज्ञानं-चर्चा भी इतनी बढ़ियां ...
कई चीजों को नोट कर लिया है , मैंने |
....................आभार .....................

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

मानव शरीर के विषय में काफी अच्छी जानकारी प्रदान की आपने....
धन्यवाद्!!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

लो !
मुझे अपना ही पता मालूम न था.

ankit said...

bahhut achaaa.read kareke gyaan badd gayaa.thankzzzzzzzzzzzz

alka sarwat said...

बड़े भाग मानुष तन पावा

Babli said...

आपके पोस्ट के दौरान बहुत ही अच्छी जानकारी प्राप्त हुई ! धन्यवाद!

Rector Kathuria said...

अरे रंजना जी, वाकई आपने तो कमाल कर दिया...कविता और विज्ञान का इतना अच्छा मिश्रण बहुत ही कम लोगों को नसीब होता है...मुबारक हो...आपकी अगली रचना का इंतज़ार है और वो भी बहुत ही बेसब्री से.....

अल्पना वर्मा said...

rochak!

radhasaxena said...

Badhiya janakaree.

vikas kumar agrawal said...

thank u so much

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