कल्पना चावला
भारत की कल्पना चावला का जन्म करनाल, हरियाणा, में एक पंजाबी हिंदू भारतीय परिवार में पैदा हुआ था कल्पना का संस्कृत में मतलब है कल्पना करना इमेजिनेशन " उड़ान में उसकी रुचि जेआरडी टाटा, जो एक अग्रणी भारतीय पायलट और उद्योगपति थे उनसे प्रेरित हो कर हुई थी ....
कल्पना ने टैगोर पब्लिक स्कूल, करनाल से स्कूली शिक्षा ली और वह 1982 में चंडीगढ़, भारत, में पंजाब इंजीनियरिंग से आगे की पढाई की और १९८४ में टेक्सास विश्वविध्यालय से एरोस्पेस इंजनियरिंग में मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री ली
१९८८में कल्पना ने नासा के एम्स रिसर्च सेंटर में कम करना शुरू किया १९९४ में कल्पना चावला का नासा के द्वारा चयन किया गया और मार्च १९९५ में अन्तरिक्ष यात्रियों के १५ वें ग्रुप में कल्पना चावला का अन्तरिक्ष यात्री के रूप में चयन हुआ ...... जानसन स्पेस सेंटर में एक साल के प्रशिक्षण के बाद कल्पना चावला की अन्तरिक्ष यात्री के प्रतिनिधि के रूप में तकनीकी क्षेत्रों के नियुक्ति की गयी ...यहाँ पर उनके दो प्रमुख काम थे रोबोटिक उपकरणों का विकास और स्पेस शटल को नियंत्रित करने वाले साफ्ट वेयर की शटल एवियोनिक्स प्रयोगशाला में टेस्टिंग करना ॥
कल्पना चावाला की प्रथम उड़ान एस टी एस ८७ कोलम्बिया शटल से सम्पन्न हुई ....... इसकी अवधि १९ नवम्बर १९९७ से ५ दिसम्बर १९९७ थी .इस में उन परीक्षणों पर जोर दिया गया कि अन्तरिक्ष में भारहीनता किस तरह से भौतिक किर्याओं को प्रभावित करती है यह मिशन अन्तरिक्ष में ३७६ घंटे और ३४ मिनट रहा और इस दौरान स्पेस शटल ने धरती की २५२ परिक्रमायें की ....
कल्पना की दूसरी और आखिरी उड़ान १६ जनवरी २००३ को स्पेस शटल कोलम्बिया से शुरू हुई ....यह १६ दिन का अन्तरिक्ष मिशन था जो पूरी तरह से विज्ञान और अनुसन्धान पर आधारित था .....इस मिशन में अन्तरिक्ष यात्रियों ने २ दिन २४ २४ घंटे काम किया था और ८० परिक्षण और प्रयोग सम्पन्न किये थे ...लेकिन १ फरवरी २००३ को कोल्म्बियाँ स्पेस शटल लेंडिंग से पहले ही दुर्घटना ग्रस्त हो गया और कल्पना के साथ बाकी सभी ६ अन्तरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गयी ...
उनकी दूसरी उड़ान को देखने उनके माता पिता और उनकी दोनों बहने भी भारत से अमेरिका गए थे और वहां पर उसकी वापसी का इन्तजार कर रहे थे पर वक़्त को कुछ और मंजूर था कल्पना वापस नहीं आई वह कल्पनाओं में ही खो गयी ...
कल्पना चावाला के साक्षात्कार के कुछ अंश उनकी दूसरी उड़ान से पहले ...
प्रश्न ...क्या आप बतायेंगी कि आपको अन्तरिक्ष के विषय में कैसे रूचि हुई और इतनी की इसने आपको नासा की और मोड़ दिया आप यहाँ कैसे आयीं ? यहाँ विज्ञाना की कौन सी चीज ने आपको आकर्षित किया ..? क्या आपको इस से सहायता मिली ?
कल्पना ... जब में भारत के हाई स्कूल में पढ़ रही थी तो मैं सोचा करती थी की मैं बहुत भाग्यशाली हूँ जो करनाल जैसे शहर में जन्मी ..जहाँ पर उस समय भी फ्लाइंग क्लब थे ..मैंने छोटे छोटे पुष्पक विमान उड़ते हुए देखती थी .मैं और मेरा भाई कभी कभी साइकल चालते हुए इन उड़ते हुए विमानों को देखा करते ..साथ साथ मैं अपने पिता जी से पूछती रहती कि क्या मैं इन वायुयानों में बैठ कर उड़ सकती हूँ ? हमारे पिता जी हमें फ्लाइंग क्लब ले जाया करते और पुष्पक विमानों में बैठा कर सैर कराया करते थे ..मैंने समझती हूँ वहीँ से मुझे एरोस्पेस इंजनियरिंग के प्रति रूचि हुई ..उम्र के साथ मैंने भारत के जे आर डी टाटा का नाम सुना ..जिन्होंने भारत में मेल भेजने के लिए वायुयानों का प्रयोग किया तभी इन्ही सब बातो के कारण जब मैं पढ़ रही थी कोई मुझसे पूछता कि तुम बड़ी हो कर क्या बनोगी तो मैं कहती एरोस्पेस इंजीनियर .....मैं भाग्यशाली थी कि मुझे पंजाब कालेज में एरोस्पेस इंजिनयरिंग में जगह मिल गयी यही मेरा सबसे प्रिय विषय था ...
प्रश्न ..क्या आप बता सकती है कि किन किन लोगों ने आपके जीवन को प्रभावित किया या अब भी आपके लिए प्रेरणा के स्रोत हैं ..?
कल्पना ...मुझे जीवन में अनेक लोगों से प्रेरण मिली सबसे अधिक अपने अध्यपकों और किताबों से
कल्पना चावला के दूसरी अन्तरिक्ष के कुछ तथ्य
१ ) प्रथम भारतीय अमरीकी अन्तरिक्ष यात्री जन्म यहाँ भारत में हुआ बाद में वह अमरीकी नागरिक बन गयी
२ ) १९९४ में कल्पना का अन्तरिक्ष यात्री के रूप में चयन
३ ) अमरीकी डाक्टरेट और एरोस्पेस इंजिनयरिंग में एम् एस
४ ) अन्तरिक्ष में जाने वाली दूसरी भारतीय महिला ..पहले यात्री राकेश शर्मा थे
५ ) फ्रांसीसी जान पियर से शादी जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे
६) स्पेस शटल की यह १३ उड़ान थी
७ ) सन २००३ में सम्पन स्पेस शटल की ५वी उड़ान
८ ) १९८६ में च्लेंजर दुर्घटना के बाद की ८८वी शटल उड़ान
९ ) यह मिशन अल्फा स्टेशन की असेम्बली के लिए नहीं था
१० ) कोलम्बिया स्पेस शटल की २८ विन उड़ान
11 ) शटल का ८५ वी दिन का प्रमोचन
१२ ) केनेडी स्पेस सेंटर की ६२ वी पूर्व निर्धारित लेंडिंग
१३ ) ९३ दिन की लेनिदंग
१४ ) केंडी स्पेस सेंटर में ४८ वि दिन लैंडिंग
1५ ) स्पेस शटल चेल्न्जर की दुर्घटना के १६.९८ वर्ष बाद शटल मिशन
1६ ) स्पेस शटल च्लेंजर की दुर्घटना के ६, १९६.९६ दिन के बाद का मिशन
यह रोचक जानकरी विश्व की महिला अन्तरिक्ष यात्री किताब से लिए गए हैं जिसको लिखने वाले लेखक है काली शंकर ....यह पुस्तक राजपाल प्रकाशन से प्रकाशित है यह कुछ तथ्य इनसे लिए गए हैं यदि आप विस्तृत रूप से इन के बारे में पढना चाहे तो इस किताब से पढ़ सकते हैं ..इस में प्रयुक्त चित्र व सामग्री अव्यावसायिक प्रयोजनार्थ हैं।
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वैज्ञानिक दृष्टीकोण तथा चेतना जगाने में संचार माध्यमों की भूमिका पर
अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन सीएसआईआर-निस्केयर, विज्ञान प्रसार, एनसीएसटीसी,
एवं एनसीएसएम द...
5 days ago

13 प्रतिक्रियाएँ:
कल्पना चावला पर ये लेख सहसा १ फरवरी २००३ की तरफ ले गया मुझे आज भी याद है वो दिन सबकी नजरे टीवी पर टिकी थी लाइव दिखाया जा रहा था....... कोल्म्बियाँ स्पेस शटल लेंडिंग से पहले जब दुर्घटना ग्रस्त हुआ था वो तस्वीरे देखि थी हमने.और दिल दहल गया था .....आभार उनके जीवन पर प्रकाश डालने के लिए.."
Regards
कल्पना चावला पर विस्तार से इस जानकारी के लिए आभार !
kalpanachawla ji ke baare mein vistar se jankari mili,bahut shukran,unke khwabon ke panchi ki udan aur hausla bahut buland raha.naaz hai un par.
कल्पना चावला, देश का गौरव थीं! उनको मेरा सलाम!
कल्पना चावला जैसी प्रेरक व्यक्तित्व की स्वामिनी को सादर नमन।
Kalpana Chawala ke baare mai itna vistar se batane ki liye abhaar...
बहुत अच्छी प्रस्तुति ... कल्पना चावला के बारे में विस्तार से जानकारी मिली ... धन्यवाद रंजना जी।
बहुत कम लोगों को ही अपने ख्वाब को हकीकत में बदल पाने का मौका मिल पता है, मगर अफ़सोस कल्पना चावला खुद ही ख्वाब बन गयीं.
बहुत ही दिलचस्प और ज्ञानवर्धक चीज़ आपने दी है. शुक्रिया.
आपको और आपके पुरे परिवार को वैशाखी की हार्दिक शुभ कामना !
कल्पना चावला जी के बारे में इतनी जानकारी मिली इस के लिए धन्यवाद.ख़ास कर इंटरव्यू के अंश और तथ्यों को पढना रोचक लगा.
मगर अफ़सोस भी है कि उनका साथ इतने कम समय का रहा.
Kalpana Chaawla jaise prerak vyaktitv se milkar achchha laga. Aabhaar.
आज देश को कल्पना चावला जैसी लौह महिलाओं की आवस्यकता है.
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