जिसपे है दुनिया को नाज़ - उसका है जन्मदिन आज (2)

महान वैज्ञानिक - सर आइज़क न्यूटन


न्यूटन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. कोई बच्चा जब विज्ञानं की दुनिया में कदम रखता है तो जिस वैज्ञानिक से सबसे पहले वह परिचित होता है वही वैज्ञानिक है सर आइज़क न्यूटन. वह वैज्ञानिक जो भौतिकविद, गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, फिलास्फर, अल्केमिस्ट, धर्मशास्त्री सभी कुछ था. न्यूटन के सिद्धांतों ने संसार को नए रूप में देखने के परदे खोल दिए. और आधुनिक भौतिकी व इंजीनियरिंग की बुनियाद रखी.
यांत्रिक भौतिकी की शुरुआत न्यूटन के गति के तीन नियमों से होती है. साइकिल से लेकर रॉकेट तक के निर्माण में कहीं न कहीं ये नियम जुड़े रहते हैं.

वैज्ञानिक तर्कशास्त्र की आधारशिला उसने चार नियमों द्वारा रखी, जो इस प्रकार हैं : (१) किसी प्राकृतिक घटना के पीछे एक और केवल एक पूर्णतः सत्य कारण होता है. (२) एक तरह की घटनाओं के लिए एक ही प्रकार के कारण होते हैं. (३) वस्तुओं के गुण सार्वत्रिक रूप से हर जगह समान होते हैं. (4) किसी घटना से निकाले गए निष्कर्ष तब तक सत्य मानने चाहिए जब तक कोई अन्य घटना उन्हें ग़लत न सिद्ध कर दे.

न्यूटन ने बताया की चीज़ों के पृथ्वी पर गिरने, चंद्रमा के पृथ्वी के परितः परिक्रमण, और ग्रहों के सूर्ये के परितः परिक्रमण के पीछे एक ही कारक है जो गुरुत्वाकर्षण का सर्वव्याप्त बल है.साथ ही पहली बार द्रव्यमान और भार के बीच अन्तर बताया. प्रकाश के क्षेत्र में काम करते हुए न्यूटन ने बताया की सफ़ेद प्रकाश दरअसल कई रंगों के प्रकाश का मिश्रण होता है. और साथ ही ये भी बताया कि प्रकाश बहुत सूक्ष्म कणिकाओं का तेज़ प्रवाह होता है. हालांकि हाइगेन्स तथा अन्य वैज्ञानिकों ने कणिका सिद्धांत को नकारते हुए तरंग सिद्धांत पर बल दिया. किंतु आज के परिपेक्ष्य में प्लांक की परिकल्पना तथा प्रकाश विधुत प्रभाव ने न्यूटन सिद्धांत को काफ़ी हद तक सही ठहरा दिया है. टेलेस्कोप के रंग दोष को दूर करने के लिए न्यूटन ने परावर्तक दूरदर्शी का आविष्कार किया.

गणित की सर्वाधिक उपयोगी शाखा कैलकुलस के बारे में इतिहासकारों का मानना है कि इसका आविष्कार न्यूटन और लाइब्निज़ दोनों ने अपने अपने तरीके से किया था. हलाँकि इसके असली आविष्कारक के लिए दोनों में कई वर्षों तक विवाद भी चलता रहा. माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई जाने वाली द्विपद प्रमेय भी न्यूटन के दिमाग की उपज है. पाई का मान निकालने के लिए भी न्यूटन ने नया फार्मूला दिया. किसी भी तरह की समीकरण के आंकिक हल के लिए भी न्यूटन ने एक फार्मूला दिया जो न्यूटन राफ्सन फार्मूला के नाम से जाना जाता है. कंप्यूटर की गणनाओं में यह काफ़ी उपयोगी सिद्ध हुआ है.

आधुनिक कैलेंडर के अनुसार न्यूटन का जन्म ४ जनवरी १६४३ को हुआ था. उसके जन्म से तीन माह पहले ही पिता की मृत्य हो गई थी. बाद में उसकी माँ ने दूसरा विवाह कर लिया था. वह जीवन भर अविवाहित रहा. शायद इसी अकेलेपन ने उसे अतिवादिता का शिकार बना दिया था. वह जितना अपने मित्रों को टूट कर चाहता था, विरोधियों के लिए उतना ही आक्रामक था. उस समय के अन्य वैज्ञानिकों रॉबर्ट हुक, क्रिस्टियन हाइगेन्स, विल्हेम लाइब्निज़ और जॉन फ्लाम्स्टीड के साथ उसका विवाद जगप्रसिद्ध है. धार्मिक रूप से वह बाइबिल तथा ईश्वर में अटूट विश्वास रखता था किंतु ईसाइयों की आम मान्यता ट्रिनिटी में उसकी आस्था न थी. उसका माना था कि ट्रिनिटी को मानने वालों ने मूल बाइबिल में उलट फेर किया है.
( ट्रिनिटी - जीसस को ईश्वर का बेटा मानना.)
न्यूटन की पुस्तक फिलास्फिया प्रिन्सिपिया मैथेमैटिका को अब तक का महानतम लिखित वैज्ञानिक कार्य माना जाता है.
सन २००५ में हुए एक अंतर्राष्ट्रीय सर्वे ने न्यूटन को सर्वाधिक लोकप्रिय वैज्ञानिक ठहराया है.

सन्दर्भ :
विकिपीडिया
डा. सुबोध महंती

20 प्रतिक्रियाएँ:

Arvind Mishra said...

"१) किसी प्राकृतिक घटना के पीछे एक और केवल एक पूर्णतः सत्य कारण होता है. (२) एक तरह की घटनाओं के लिए एक ही प्रकार के कारण होते हैं. (३) वस्तुओं के गुण सार्वत्रिक रूप से हर जगह समान होते हैं. (4) किसी घटना से निकाले गए निष्कर्ष तब तक सत्य मानने चाहिए जब तक कोई अन्य घटना उन्हें ग़लत न सिद्ध कर दे."
वस्तुतः सुसंगत और तार्किक चिंतन का यह एक बेहतरीन उदाहरण है ! कभी ऐसी ही चिंतन क्षमता हमारे प्राच्य विद्वानों में भी किंतु वे इतने अन्तर्मुखी थे इन बातों को अपने साथ ही लेते गए ! या कुछ दूसरे लोगों ने उनकी कुछ सुने सुनाई बातों को संग्रहीत जरूर किया पर उनमें वह मौलिकता कहाँ !
आभार जीशान !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

जीशान भाई, इस पोस्ट से लग रहा है कि हम विज्ञान को हिन्दी में प्रस्तुत करने की ओर एक कदम आगे बढ़ गए हैं। प्रसन्नता है। शेष सदस्य भी योगदान करेंगे तो यह काम चल निकलेगा। शुभकामनाएँ।

अल्पना वर्मा said...

४ जनवरी १६४३ को जन्मे महान वैज्ञानिक - सर आइज़क न्यूटन के बारे में जानकारी के लिए धन्यवाद.

सतीश पंचम said...

सुबोध जी, आज की मेरी पोस्ट के जिम्मेदार आप हैं:) दरअसल, मेरी एक पोस्ट में न्यूटन का जिक्र आया था और आपकी इस पोस्ट से पता चला कि आज न्यूटन का जन्मदिन है, सो वही पोस्ट पुनः प्रकाशित की गई है। जानकारी देने के लिये धन्यवाद।

सतीश पंचम said...

मेरी आज की पोस्ट कुछ तकनीकी कारणों से Index पेज पर नहीं आ रही है, फिलहाल इस लिंक पर उपल्बध है।

http://safedghar.blogspot.com/2009/01/blog-post_04.html

Suresh Gupta said...

एक उपयोगी लेख के लिए वधाई. आज का दिन वास्तव में महत्वपूर्ण है, कि इस दिन न्यूटन का जन्म हुआ था.

अभिषेक ओझा said...

आभार इस प्रस्तुति के लिए. न्यूटन को कौन नहीं जानता !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

जीशान भाई, आपकी सक्रीयता काबिले तारीफ है। इस श्रंखला की कामयाबी के लिए हार्दिक शुभकामनाऍं।

कीर्ति वैद्य said...

न्‍यूटन के बारे में इतना जानकारीपूर्ण आलेख पढकर अच्‍छा लगा। यह श्रंखला कांटीन्‍यू करें, इससे काफी ज्ञानवर्द्धन हो रहा है।

अर्शिया अली said...

इस जानकारीपूर्ण लेख के लिए आभार।

डा0 दिनेश चन्द्र अवस्थी said...

जानकारीपूर्ण लेख है, धन्‍यवाद एवं शुभकामनाऍं।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

इतनी सुंदर जानकारी के लिए धन्यवाद

कविता said...
This comment has been removed by the author.
कविता said...

गुरूत्‍वाकर्षण के सिद्धान्‍त के जन्‍मदाता का परिचय देने का आभार।

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

न्यूटन को कौन नहीं जानता??? पर हिन्दी जगत में इस प्रयास के लिए आप सब बधाई के पात्र हैं////

और अब आयें ....मेरी मदद करें

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

न्यूटन को जन्मदिन की बधाई.

विवेक सिंह said...

न्यूटन को हमारी भी श्रद्धांजलि !

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

आप लोग कम से कम बात का सम्मान तो रखते हैं भले ही आदमी का सम्मान हो न हो..... टिप्पणी हटाने के लिये कहा था आप ने झट से हटा दी..... खाली दिमाग भगवान का घर.... जाकिर बाबू जवाब तो दे दीजिये हमारी बातों का... अब इस टिप्पणी को भी हटा दीजियेगा:)

Shastri said...

जानकारी से भरपूर जीवनी !!

Anonymous said...

४ जनवरी १६४३ को जन्मे महान वैज्ञानिक - सर आइज़क न्यूटन के बारे में जानकारी के लिए धन्यवाद.

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